जबलपुर, 25 फरवरी 2026। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी लॉ ऑफिसर की नियुक्ति को लेकर गंभीर मामला दर्ज करते हुए संबंधित पक्ष से तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने महाधिवक्ता कार्यालय को कहा कि अगली सुनवाई से वे खुद उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करें।

यह मामला 25 दिसंबर 2025 को जारी 157 सरकारी लॉ ऑफिसर पदों की नियुक्तियों से जुड़ा है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव योगेश सोनी ने याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया कि नियमों के विपरीत अपात्र व्यक्तियों को सरकारी वकील नियुक्त किया गया।
याचिकाकर्ता का दावा है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और मनमानी थी। नियम के अनुसार सरकारी वकील बनने के लिए न्यूनतम 10 साल का प्रैक्टिस अनुभव अनिवार्य है, जबकि कुछ नियुक्त लॉ ऑफिसरों के पास यह योग्यता नहीं थी।
पूर्व में जारी नोटिस की तामील नहीं होने और महाधिवक्ता कार्यालय तथा संबंधित लॉ ऑफिसरों द्वारा नोटिस न लेने की बात भी याचिका में उठाई गई। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई में बयान रिकॉर्ड किया और स्पष्ट किया कि अगली बार महाधिवक्ता खुद अदालत में उपस्थित होकर पैरवी करेंगे।
जानकारी के अनुसार, महाधिवक्ता कार्यालय में कुल 157 सरकारी लॉ ऑफिसर नियुक्त किए गए थे। अदालत ने इस मामले में जवाब न मिलने पर कड़ी कार्रवाई का संकेत भी दिया है।