
मनोरमा सिंह
जन्नत (अमेरिका) की हकीकत, एपस्टीन फाइल्स ने पूंजीवाद और पूंजीपतियों का घिनौना चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब किया है, उफ़ हमलोग अपने देश यानि विकासशील देशों और तीसरी दुनिया के देशों के जिन बातों के लिए रोते रहे हैं, पता चल रहा है, वो सब अपने घिनौने, वीभत्स रूप में सबसे ज्यादा संसाधन संपन्न लोगों की शगल रहा है।
ओर्केस्ट्रा की लड़किया, बाड़े जैसी गाड़ियों में बंद लेकिन नाचती हुई, महफ़िलों में डांस करती लड़किया अधेड़ बूढ़े मर्दों की गोद में… जैसी तस्वीरों पर मन भीतर से शर्म और क्षोभ से भर जाता था, बलि की ख़बरें हमें अंधे युग में ले जाती रही हैं और इसी समय ज्ञान, प्रगति, वैज्ञानिक सोच, न्यायपूर्ण समाज का अगर कोई पैरेलल खींचता तो वो अमेरिका और योरोप होता रहा है, वही अमेरिका जहाँ पोल डांस होता रहा, लैप डांस होता रहा और अब एपस्टीन फाइल्स जो अनसील कर रहा है अपने 35 लाख फाइलों में उसमें एक बड़ा हिस्सा छोटी बच्चियों से सेक्स, उनकी बलि, उनके मांस खाये जाने, खून पीये जाने तक के डीटेल्स के हैं, साथ ही मजबूर लड़कियों और लड़कों को सेक्स स्लेव बनाये जाने और उनके साथ के भी अंग बलि से लेकर तमाम बर्बर और घृणास्पद विवरण हैं।
मसलन, जेफरी एपस्टीन की पार्टीज जहाँ होती थी उस लिटिल सेंट जेम्स आइलैंड का नाम ही ऑर्गी आइलैंड या पेडोफाइल आइलैंड था। यहां “टेम्पल” में सेक्स रिचुअल्स होते थे, लड़कियां नग्न होकर ऑफरिंग करती थीं। गवाहों के मुताबिक ब्लड और सेक्रेड रिचुअल्स यहाँ का हिस्सा थे, कुछ पार्टीज़ में ब्लड ड्रिंकिंग या सेक्रेड सेरेमनी”होती थीं, जहां अमीर लोग युवा ऊर्जा चूसते थे। एक गवाह ने मैरिज ऑफ द डेड रिचुअल का जिक्र किया है, जहां लड़कियों को मृत जैसा बनाकर इस्तेमाल किया जाता था।

अब, जब जेफरी एपस्टीन की फाइल्स (कोर्ट डॉक्यूमेंट्स, फ्लाइट लॉग्स, ब्लैक बुक, ईमेल्स और गवाह बयान) एक-एक करके अनसील हो रही हैं, तो अमेरिका वैश्विक दादागिरी, साम्राज्यवादी, दुनिया भर के देशों का लुटेरा मुल्क से इतर एक बीमार, यौन विकृत या सेक्स परवर्ट, यौन कुंठित समाज और देश के रूप में भी सामने आ रहा है। एपस्टीन फाइल्स की कुल 60 लाख से ज्यादा पेजेस की समीक्षा की गई है। जबकि अब भी एपस्टी फाइल्स के 2 लाख पन्ने सार्वजनिक नहीं किये जाएंगे क्योंकि वो प्रिविलेज्ड पेजेज हैं, इसलिए कानूनी रूप से इन्हें पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। और बेशक यह अमेरिका के न्याय तंत्र की सीमाओं को दिखाता है जहां ताकतवर लोगों की गोपनीयता की रक्षा पहले की जाती है, राष्ट्रपति कानून से ऊपर होता है।
दरअसल, एपस्टीन फाइल्स सिर्फ एक व्यक्ति की विकृतता की कहानी नहीं हैं, ये दिखाती हैं कि कैसे दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर लोग एक संगठित, क्रूर और बेहद वीभत्स सिस्टम में शामिल होते हैं। और पूंजीवाद का ये बेशुमार पैसा, आखिर खर्च कैसे हो? जवाब में लोगों को ही नहीं एक पुरे सिस्टम को परवर्ट बना देता है।
अगर इन फाइल्स के विवरण से गुजरे होंगें तो ये भी गौर किया होगा कि सारे सेक्स परवर्ट पुरुष हैं, ये सारे पूंजीपति, ताकतवर सत्ताधारी, रॉयल्टी सब हैं और पुरुष हैं और महिलायें सिर्फ शोषण का माध्यम हैं बच्चियों से लेकर तमाम उम्र की। धर्म, जाति, नस्ल, रंग और लिंग या जेंडर सभी स्तर पर दुनिया को बेहतर बनाने के तमाम संघर्ष और जद्दोजहद का इतिहास एक तरफ और इन फाइलों में दर्ज विवरण एक ओर…. क्या हुआ कि यही देश हर रोज पहले से ज्यादा एडवांस “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ” लाता जा रहा है, और मंगल पर दूसरी दुनिया बनाने जा रहा है भले अपनी गुफाओं, द्वीपों और खाड़ियों में नर्क की सड़ांध छिपाये हुए है।
ये भी संयोग है कि तीन-चार दिन पहले मैंने नेटफ्लिक्स पर “ट्रेन ड्रीम्स” देखी थी, फिल्म की उदासी और दुःख ने मन पर ऐसा असर डाला कि लगा शब्द गुम हो गए, फिल्म अमेरिकन ड्रीम के उस स्याह पक्ष को अनुभूत कराती हैं कि अमेरिका की प्रगति कितनी खूबसूरत और कितनी क्रूर है। वो प्रगति जिसमें जंगल उजड़ते हैं, परिवार जल जाते हैं, प्रवासी जिन्दा मार दिए जाते हैं और एक साधारण मजदूर अपनी आत्मा पर दुःख और जमीर पर ग्लानि का बोझ उठाये अकेला होता है, जीता है और मर जाता है… शायद अब भी यही सच है वहां.
लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं.