मनीषा तिवारी
प्रेम दिवस, प्यार का दिन या प्रेम के इज़हार का दिन, प्रेम किए जाने को पहचानने का दिन, एक ऐसा दिन जब दुनिया के कई देश एक साथ प्यार करने और प्यार मे होने की बात करें. एकबारगी देखें तो पिछले कुछ वर्षों मे हम सब प्रेम दिवस को चिन्हित करने लगें हैं, कभी दूसरों पर इस दिन को विशेष दिन के रूप मे मनाने की खिसियाहट निकाल कर, तो कभी इस दिन को खुद मना कर. ऐसा करते हुए इतने वर्षों मे ये तो लगभग तय मान लिया गया कि वर्ष के इस एक दिन को प्रेम के इज़हार के एक विशेष दिन के रूप मे देखा जाने लगा हैं. इसमें कोई मसला नहीं हैं, क्यों हो; जब बात प्रेम की है, प्यार और इश्क की हैं, बजाय इसके लड़ाई, दुर्भावना और दुश्मनी की नहीं.
लेकिन इसकी चिंता तब जरूरी है जब प्रेम शब्द संकुचित अर्थ और सीमित परिभाषा मे महसूस किया जाये और परिलक्षित भी हो तो दो जोड़ों के बीच पनपते रूमानियत के चित्रण मे.
वास्तव मे 14 फरवरी- वैलेंटाइन्स डे को लेकर कई दंतकथाएँ हैं. अव्वल तो ये कि वैलेंटाइन्स डे का आविर्भाव कैथोलिक ईसाइयों के देशों से, विशेषकर रोम से निकलकर विश्व के अन्य देशों मे जब पहुंचा तो इसके केन्द्र मे वालेन्तिन्स नाम के कैथोलिक ईसाइयों के शहादत की दंतकथाएं प्रचलित थी जिन्होंने निवर्त्तमान रोम शासकों के समक्ष अपने धर्म की रक्षा मे अपने प्राणों की आहुति दी थी. हालांकि वैलेंटाइन्स डे और 14 फ़रवरी को लेकर अन्य तमाम कहानियां भी प्रचलित है परंतु ध्यान देने योग्य यह है कि इन कहानियों मे रुमानी प्रेम कहानी कहीं-कंही हीं सुनायी पडती हैं, और पड़ती भी हैं तो रॉम के अतिरिक्त अन्य देशों की नयी बुनी कहानियों मे, प्राचीन घटनाओं के जिक्र में नहीं.

14 फ़रवरी के जश्न को हम जब अपने देश के आज के युवाओं में देखते हैं तो लगता हैं कि हम शब्द और भावनाओं की संकीर्ण समझ के साथ-साथ विचारों और विचारों की समुचित व्याख्या करने के लिए या तो तैयार नहीं हैं या तैयार होने की समझ नहीं रखते हैं.
प्रेम वृहद अर्थो वाला शब्द हैं, जब वाक्य में ढलता हैं तो क्रिया के साथ-साथ कई विशेषनों को समेटता चलता हैं. कभी रुमानी होता हैं, कभी आदरणीय भी होता हैं, कभी कृतज्ञ, कभी धन्य होता हैं.
इसबार यदि हम प्रेम दिवस को इसके विस्तृत अर्थ पटल पर महसूस करते हुए उस औरत से प्यार का इज़हार करें जिसने अपने आँचल में छोटे छोटे स्कूली बच्चों को मधुमक्खीयों के दंश से बचाया और उस दंश को खुद के शरीर पर लेते हुए वो अमर हो गयी. हम उस महिला से भी अपने प्यार का इज़हार करें जो स्कूल नही जा सकने वाले बेसहारा गरीब बच्चों को शिक्षा देने का काम कर रहीं हैं. आज के दिन हम उन सभी हिम्मती स्त्रीयों से प्यार का इज़हार करें जो समाज में सर्व धर्म संभाव को जीवित रखने के संघर्ष में शामिल हैं, सवाल करती हैं और सवाल करने पर मिली गालियों से तार तार हो फिर हिम्मत के साथ मुहब्बत की बात करती हैं.इस बार की हमारी वैलेंटाईन वो क्यों नहीं जो दिसंबर की ठिठुरन मे इंडिया गेट पर एक बच्ची के सच और आत्मसम्मान की लड़ाई मे तन कर खड़ी रहती है. हमने जिसे अपने जीवन पथ पर साथ चलने को चुना है, या विधाता ने जिस किसी को भी हमसाथ किया है, बेशक हम उन्हे प्यार करते रहे , इस एक दिन क्या; हज़ार दिन पहले भी और असीमित दिन आगे भी; लेकिन सरस, मधुर समाज, प्रेम करता समाज और प्रेम चुनता समाज तैयार करना भी हमारी ही ज़िम्मेदारी होगी, जहां हम दो साथ और हमारे सभी “साथ” प्रेम मे रह सके. इसलिए जरूरी है आज के दिन हम प्रेम को पूरे खुले आकाश की तरह देखें, आकाश मे चमकते तारों की तरह देखें, बजाए कि आकाश मे चमकते एक चंद्रमा की तरह .