रायपुर। बजट के दिन सुबह शेयर बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई थी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण के दौरान भी सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी बनी रही। हालांकि, जैसे ही एसटीटी और बायबैक पर कर बढ़ाने की घोषणा हुई, बाजार की दिशा अचानक बदल गई और तेज बिकवाली शुरू हो गई। कुछ ही समय में सेंसेक्स करीब 2400 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी में लगभग 750 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बाद में आंशिक रिकवरी जरूर हुई, लेकिन बाजार करीब दो फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। यह बीते छह वर्षों में बजट वाले दिन की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
वित्त मंत्री द्वारा डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। सरकार का कहना है कि यह कदम फ्यूचर और ऑप्शन सेगमेंट में बढ़ती सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद सेंसेक्स दिन में 2370 अंक तक लुढ़ककर 80 हजार के नीचे पहुंच गया और अंत में 1546 अंक की गिरावट के साथ 80,722 के आसपास बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी दिन के दौरान करीब 749 अंक टूटकर 24,571 तक आ गया और कारोबार के अंत में लगभग 495 अंक गिरकर 24,825 पर बंद हुआ।
तेज बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 9.40 लाख करोड़ रुपये घट गया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। अडानी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटीसी, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी दबाव में रहे। वहीं टीसीएस, इंफोसिस, सन फार्मा और टाइटन जैसे कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती देखने को मिली। कुल मिलाकर बाजार का रुख नकारात्मक रहा, जहां गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से कहीं अधिक रही।
वित्त मंत्री ने ऑप्शन कांट्रैक्ट्स पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही ऑप्शन प्रीमियम और एक्सरसाइज पर लगने वाले कर को भी मौजूदा दरों से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से खासतौर पर फ्यूचर और ऑप्शन सेगमेंट में कारोबार पर दबाव पड़ेगा और विदेशी निवेशकों की रुचि भी कुछ हद तक घट सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये पर दबाव के चलते विदेशी निवेशक सतर्क हैं। ऐसे माहौल में एसटीटी में वृद्धि से लेनदेन लागत बढ़ेगी, जिससे अल्पकालिक और डेरिवेटिव आधारित निवेश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसका असर बाजार की तरलता और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी देखने को मिल सकता है।