भौतिक सत्यापन से ही अनियमितताओं की खुलेगी पोल
आज की जनाधारा ” ने लगातार भौतिक सत्यापन के लिए उठाई थी आवाज
दिलीप गुप्ता
सरायपाली:- सरायपाली के विभिन्न धन खरीदी केंद्रों में बरती जा रही लापरवाही , अनियमितताओं व भ्रष्टाचार पर अंकुश व प्रभारी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्यवाही किए जाने हेतु केंद्रों के भौतिक सत्यापन किए जाने की मांग संबंधी सुझाव ” आज की जनाधार ” द्वारा समाचार प्रकाशन के प्रशासन के संज्ञान में लाता रहा है । संभवतः इसे संज्ञान में लेते हुवे जिला प्रशासन द्वारा बड़ा व साहसिक निर्णय लिया गया है ।
किसानों के धान फसलों को खरीदने शासन द्वारा ग्रामीण स्तर पर धान उपार्जन केंद्रों की स्थापना की है । इसके पीछे सरकार का उद्देश्य था कि किसानों को अपनी फसल बेचने अधिक दूर जाना न पड़े व समीप में ही धान बेचने की सुविधा उन्हें कम समय व खर्च पर फसलों का विक्रय हो सके इसलिए अधिक से अधिक साधन व सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है किंतु अधिकारियों , उपार्जन केंद्र प्रभारियों , प्राधिकृत अधिकारीयों, बिचौलियों, छूट भइये नेताओं व कुछ लालची किसानों की वजह से इस धान खरीदी केंद्रों को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया । दुधारू गाय की तरह इसे दुहा गया । सत्ता में बैठे नेताओं को खुश करने के चक्कर में धान खरीदी केंद्रों के प्रभारी अधिकारियों पर कानून का डंडा चलने लगा व नेता बचते रहे ।

महासमुंद जिले में ही अभी तक के इतिहास में पूर्व में जबसे सरायपाली में एसडीएम के पद पर पदस्थ रहे व वर्तमान में जिले के कलेक्टर के रूप में विनय कुमार लंगेह की पदस्थापना होने के बाद से अवैध व्यापार के प्रत्येक क्षेत्रों में उन्होंने कड़ी व बड़ी कार्यवाही की है । लगातार ग्रामीण क्षेत्रों , धान खरीदी केंद्रों व अन्य का स्वयं दौरा कर बारीकी से निरीक्षण किए जाने व आमजनता तथा किसानों से प्रत्यक्ष संपर्क किए जाने के बाद अनेक कमियों को उन्होंने सुधारा व चेतावनी के साथ कार्यवाही भी की ।अवैध धान परिवहन , भंडारण व विक्रय करने वाले व्यापारियों , बिचौलियों व राईस मिलर्स पर भी अभी तक की सबसे बड़ी कार्यवाही की गई । इस बीच कलेक्टर के मंशानुरूप सरायपाली एसडीएम सुश्री अनुपमा आनंद भी भारी ठंड के बावजूद अपने अधिकारियों के साथ देर रात छापामार कार्यवाही करती रही । जिसके परिणाम स्वरूप क्षेत्र के इतिहास में पहली बार धान खरीदी केंद्रों के प्रभारियों , बिचौलियों , जांच चौकी में तैनात कर्मचारियों , वाहन चालकों , मालिकों , व्यापारियों , राइस मिलर्स पर दंडात्मक कार्यवाही , जप्ती के साथ ही निलंबन की भी कार्यवाही की गई । वाहनों , गोदामों , राइस मिलो से हजारों पैकेट धान की जप्ती कार्यवाही भी की गई । पहली बार अवैध गैस रिफिलिंग करने वालो पर भी भारी कार्यवाही हो सकी ।
कलेक्टर व एसडीएम द्वारा लगातार जमीनी हकीकतों को जानने के बाद धान खरीदी में बरती जा रही लापरवाही व उनके कारणों पर गंभीरता से विचार करते हुवे तय किया गया कि धान के अंतिम दिनों में कड़े तेवर अख्तियार करते हुवे अभी तक का सबसे बड़ा व साहसिक फैसला लेते हुवे एक ओर सभी धान खरीदी केंद्रों के भौतिक सत्यापन किए जाने का निर्णय लेते हुवे 23 जनवरी तक खरीदे गए धान के सत्यापन व पंचनामा किए जाने का निर्णय लिया गया तो वहीं 27 जनवरी से खरीदी किए जाने वाले धान को अन्य खरीदे गए धानों से अलग रखते हुवे उनके परिवहन किए जाने पर रोक लगा दी गई है । धान खरीदी में अनियमितताओं की जांच हेतु कुछ बिंदुओं पर जांच प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है । अधिकारीगण किसानों के घर घर जाकर विभिन्न बिंदुओं की जानकारी लेकर जांच करेंगे । निश्चित रूप से कलेक्टर की यह पहल जहां धान खरीदी केंद्र को पारदर्शी बनाएगा तो वहीं अभी तक किए गए अनियमितताओं को भी सामने लायेगा । इसके साथ ही पूरी पारदर्शिता के साथ एक स्वच्छ व ईमानदारी के साथ धान खरीदी की प्रक्रिया में सुधारात्मक कदम साबित होगा ।
ज्ञातव्य हो कि धान खरीदी केंद्रों में खरीदे व रखे गए धान के भौतिक सत्यापन किए जाने की मांग अनियमितताओं व भ्रष्टाचार को रोकने हेतु ” आज की जनधारा “द्वारा लगातार समाचारों का प्रकाशन कर प्रशासन का ध्यान भौतिक सत्यापन किए जाने हेतु आकृष्ट कराते रहा है । विदित हो कि समीपस्थ ग्राम केना धान खरीदी केंद्र में भौतिक सत्यापन के उपरांत ही 50 लाख रुपए की गड़बड़ी सामने आ सकी व प्रभारी गोपाल नायक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई संभवतः उपरोक्त कारणों व मांगो को ध्यान में रखते हुवे प्रशासन द्वारा अन्य खरीदी केंद्रों में भी भौतिक सत्यापन का निर्णय लेते हुवे जांच हेतु नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है ।
इस संबंध में जिला कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कलेक्टर द्वारा बड़े पैमाने पर धान की रिसाइक्लिंग किए जाने की आशंका व संभावना को देखते हुवे राइस मिलरो को दिए जाने वाले धान के उठाव पर रोक लगा दी गई है । विगत दिनों सरायपाली के कुछ राइस मिलो में छापामार कार्यवाही करते समय हजारों पैकेट धान कम मिलने व रिसाइक्लिंग किए जाने की आशंका बताई गई थी वहीं जांच में कई मिलो में वास्तविक स्टॉक दिखाए गए दस्तावेजी आंकड़ों से काफी कम मिला । आशंका व्यक्त की गई कि थी कि कहीं धान के उठाव के बाद यह धान कहीं पुनःदसरे किसानों के नाम पर विक्रय तो नहीं कर दिया जा रहा है । इसलिए विगत 17 जनवरी से इस खेल को रोकने आनलाइन गेटपास डीओ पर रोक लगा दी गई । स्थानीय प्रशासन द्वारा सरायपाली के कुछ राइस मिलो में जब छापामार कार्यवाही की गई थी तब कुछ राइस मिलो में इस तह की शिकायतें सामने आई थी ।
धान उठाव पर रोक लगाने के साथ ही प्रशासन ने अब जमीनी स्तर पर सत्यापन शुरू कर दिया है। जांच अधिकारी सीधे उन किसानों के घर और खेतों में पहुंच रहे हैं जिन्होंने बड़ी मात्रा में धान बेचा है या जिनका रिकॉर्ड संदेहास्पद लग रहा है। ऐसे सभी किसानों के यहां अधिकारी जाकर किसानों से प्रत्यक्ष मुलाकात कर अनेक बिंदुओं पर सत्यापन करेंगे ।अधिकारियों द्वारा किसानों से उनकी भूमि , पैदावार , धान उपज की स्थिति आदि बिंदुओं की जानकारी एकत्र करेंगे । अधिकारी गण किसानों से मुख्यत किसान के पास उतनी भूमि है जितना धान उन्होंने समिति में बेचा है? किसान के घर या खलिहान में क्या अब भी कुछ धान बचा है या सारा धान पहले ही बेचा जा चुका है? कहीं मिलरों से निकला हुआ धान ‘कोचियों’ के माध्यम से किसानों के नाम पर फिर से तो नहीं बेचा गया या बेचा जा रहा है । कहीं दूसरे के भूमि पट्टे पर धान तो नहीं बेचा गया है। इसी तरह अधिकारी यह भी जांच करेंगे कि राइस मिलो में आने वाले धान कहीं दोबारा तो नहीं बेचा जा रहा है क्योंकि कुछ समय से इस तरह की शिकायतें मिलती रही है ।इस तरह कई बिंदुओं पर किसानों से जानकारी मांगी जाएगी इससे वास्तविक किसानों को लाभ मिलेगा तो वहीं किसानों को भी जिम्मेदार बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है । जब किसान जागरूक व सतर्क होंगे तो उपरोक्त अनेक शिकायतें स्वत ही समाप्त हो जाएगी।
अक्सर देखा गया है कि कुछ बड़े किसान अपना पूरा धान नहीं बेचते ऐसे किसानों की जानकारी बिचौलियों व कोचियों को होती है । व्यापारियों वी अन्य प्रांत से अवैध रूप से लाए गए धान को इन किसानों के पट्टो से उपार्जन केंद्रों में प्रभारियों के माध्यम से मिलीभगत कर बेचा जाता है । वे अपने पट्टो का लालच में आकर दुरूपयोग करते हैं । इस तह की अनियमितताओं व गड़बड़ियों को रोके जाने ही कुछ कड़े निर्णय लिए जा रहे हैं ताकि इसका लाभ जहां वास्तविक किसानों को मिल सके तो वहीं धान खरीदी केंद्रों में भी पारदर्शिता बनी रहेगी।
इस प्रक्रिया व कड़ाई से जहां कोचियों , बिचौलियों, व्यापारियों, तस्करों , छूट भैय्या नेताओं व प्रभारी अधिकारियों पर भी कार्यवाही होने का दबाव बनेगा तो वहीं धान खरीदी केंद्रों के प्रभारी अधिकारियों पर भी पारदर्शिता व ईमानदारी से धान खरीदे जाने का प्रशासनिक दबाव भी बनेगा ।