रायपुर. राजधानी रायपुर के तहसील कार्यालय में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देर रात जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के इशारे पर मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए तहसीलदार से दावा-आपत्ति फॉर्म दिखाने की मांग की।
कांग्रेस का आरोप है कि तहसील कार्यालय में कुल 400 दावा-आपत्ति फॉर्म नियमों के विपरीत स्वीकार किए गए हैं। नियमों के अनुसार केवल 30 से 50 फॉर्म तक ही स्वीकार किए जा सकते हैं, लेकिन अधिक फॉर्म स्वीकार कर कुछ नाम काटे जा रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इन 400 फॉर्म दिखाए जाने की मांग की। तहसीलदार ने बताया कि फॉर्म स्वीकार करने वाले बाबू फोन नहीं उठा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने तहसील कार्यालय के केबिन में बैठकर नारेबाजी की। पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल पहुंचा दी। इस दौरान पुलिस और कांग्रेसियों के बीच झड़प भी हुई।
मामले की जानकारी मिलते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज बड़ी संख्या में पदाधिकारियों के साथ जेल परिसर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। स्थिति बिगड़ती देख मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और सभी कांग्रेसियों को निशर्त रिहा कर दिया गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि उनके कार्यकर्ता एसआईआर की गड़बड़ी के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने शांति भंग करने के झूठे आरोप में सैकड़ों कार्यकर्ताओं को जेल भेज दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता तहसील कार्यालय में बाबुओं के माध्यम से बल्क में फॉर्म जमा करवा रहे हैं। भाजपा के इशारे पर एसआईआर के नाम पर पूरे देश में मतदाताओं के नाम काटने का खेल खेला जा रहा है। कांग्रेस इस पर लगातार सतर्कता बरत रही है।
प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।