
लता कोकास, दुर्ग, छत्तीसगढ़ में रहती हैं व शासकीय स्कूल में गणित विषय के अध्यापन कार्य से हाल ही के वर्षो मे सेवानिवृत हुईं हैं. आप सेवानिवृती के बाद भी पढ़ने लिखने और गणित जैसे जीवंत विषय पर काम करती रहती हैं तथा इस हेतु शासन द्वारा आपको पुरस्कृत भी किया गया है. कविता-साहित्य में रुचि रखने वाली लता कोकास जी की एक और पहचान यह भी है कि वह हिंदी के महत्वपूर्ण कवि-पुरातत्ववेता शरद कोकास की जीवन संगिनी हैं. उनके घर में एक सुंदर लाइब्रेरी है और पढ़ने लिखने का जीवंत माहौल भी.
पिछले दिनो जगदलपुर मे अध्यापन से जुड़ी व कला साहित्य मे गहन रुचि और जुड़ाव रखने वाली सरिता सिंह जी ने शिक्षाविद लता कोकास से उनके व्यक्तिगत जीवन, पठन-पाठन, और शरद कोकास जी की जीवन संगिनी के रूप मे उनके अनुभव साझा किए जो प्रेरणादायी और रोचक हैं. प्रस्तुत है लता कोकास के साथ सरिता सिंह की बातचीत के कुछ अंश.
प्रश्न 1अपने बचपन और अपनी शैक्षणिक उपलब्धि के बारे में बताइए तथा अध्ययन अध्यापन से जुड़ी कोई रोचक घटना, आपके अनुभव कृपया साझा करिए?
मैं बचपन में पढ़ाई में हमेशा अव्वल रही हूँ. मेरी गणित विषय में रुचि रही है. मेरी सबसे बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि यह रही है कि मुझे दो हज़ार बाईस तेईस में राज्य शासन का उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान प्राप्त हुआ है लेकिन मेरी उससे भी बड़ी उपलब्धि यह है कि मेरे पढ़ाये गए कुछ बच्चे इंजीनियर बने, कुछ सेना में और कुछ पुलिस में गए और कुछ अच्छे शिक्षक बन गए. इन उपलब्धियो से मन में एक संतोष रहा कि मेरे पढ़ाये हुए बच्चे सब अच्छी पोस्ट पर रहे. इनमें सबसे प्रिय छात्र विलास सिरमौर रहा.
अध्यापन का अनुभव यह रहा कि पढ़ाते हुए पांच घंटे कैसे निकल जाते थे पता ही नहीं चलता था. बच्चों के स्तर तक जाकर उन्हें पढाना पड़ता था क्योंकि आठवीं तक तो जनरल प्रमोशन ही है अतः बच्चों में कुछ कमियां रह जाती थीं. बच्चों को रोचक ढंग से गणित पढ़ाने में मुझे बहुत आनंद आता है. कुछ बच्चे काम करके स्कूल आते थे, थके रहते थे तथा कुछ बच्चों को गणित में रुचि न होने के कारण उन्हें प्रथम कालखंड से ही नींद आने लगती थी ऐसे समय सोते हुए बच्चों का ध्यान भंग करने के लिए उनकी ओर मैं चाक फेंकती थी. आवाज़ से जैसे ही बच्चे की नींद खुलती थी वह पूछता “क्या हुआ मैडम?” तब मैं कहती “तुमने क्या सपना देखा? उसका जवाब सुनकर पूरी कक्षा में हँसी का माहौल हो जाता था और वह झेंप जाता. फिर मैं उन बच्चों को फिर से गणित समझाती. सोनेवाले बालकों में मनीष साहू ऐसा ही एक बालक था, जो आज एक जाना –माना मेहंदी आर्टिस्ट है.
स्कूल के दिनों की एक रोचक घटना मुझे याद आती है. एक बार मैं नवमी कक्षा में गणित पढ़ा रही थी. मैं ब्लैक बोर्ड पर गणित हल कर रही थी किअचानक गाय पर मेरा ध्यान गया. गाय कक्षा मे घुस आयी थी और डेस्क पर रखी गणित की पुस्तक चबाने ही वाली थी कि मैंने अपने हैण्ड बैग से उसे भगाने की कोशिश की. इस कोशिश में मेरा बैग उसके गले में लटक गया. घबराकर गाय भागने लगी. कुछ समय बाद दृश्य अद्भुत था गाय के पीछे स्कूल का चपरासी, उसके पीछे मै और मेरे पीछे बच्चे दौड़ रहे थे.
दूसरी घटना उस दौर की है जब मैं जबलपुर विश्वविद्यालय से शाम को घर लौटते समय मेरी सहेली गीता सोनी कब गाड़ी से उतर गई, मुझे पता भी नहीं चला और मैं रास्ते भर अकेले बात करती रही. लोग हंसते रहे कि यह लड़की अकेले क्या बड़बड़ा रही है .
प्रश्न 2वर्तमान शिक्षा पद्धति से आप कितनी संतुष्ट हैं? महिलाओं खासकर लड़कियों की शिक्षा को लेकर आप क्या सोचती है?
वर्तमान शिक्षा पद्धति से मैं कुछ हद तक संतुष्ट हूं. कुछ सकारात्मक पहलू है, और कुछ चुनौतियां भी हैं, कुछ सुधार की आवश्यकता भी है. लड़कियों की शिक्षा के बारे में कुछ सकारात्मक पहलू हैं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, शिक्षा का अधिकार, लड़कियों के लिए विशेष योजनाएं, समाज में जागरूकता. लड़कियों के लिए चुनौतियां भी हैं जैसे लड़कियों की शिक्षा की दर बढ़नी चाहिए, शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि होनी चाहिए तथा उनके लिए, सुरक्षित माहौल होना चाहिए. इन चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास करना होगा. लड़कियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी उत्पन्न करना होगा जिससे उनमे फैलने वाले व्यर्थ के अंधविश्वास जादू टोना से बचना होगा. हमारे देश में अंधविश्वास के कारण बहुत सारी स्त्रियों का शोषण होता है, इसलिए स्त्री शिक्षा में वैज्ञानिक चेतना जरूरी है. सावित्रीबाई फुले ने जिन उद्देश्यों को लेकर स्त्री शिक्षा अभियान चलाया था उसे जारी रखना होगा.
प्रश्न3 आप रचनाकार कवि, पुरातत्ववेत्ता शरद कोकास की जीवन संगिनी हैं उनके लेखन व दिनचर्या को लेकर आप किस तरह का सहयोग करती हैं क्या आप भी लिखती हैं?
मैं कवि लेखक शरद कोकास के लेखन और समय प्रबंधन में आवश्यकतानुसार मदद करती हूं तथा उनके घर के कामों में भी मदद करती हूं ताकि वे अपने लेखन के लिए पर्याप्त समय दे सकें. इसके अलावा मैं उन्हें सहयोग और समर्थन भी प्रदान करती हूं साथ ही उनकी व्यक्तिगत देखभाल भी करती हूं जिससे उनमे अधिक आत्मविश्वास पैदा हो तथा वे निश्चिन्त होकर लेखन कार्य कर सकें.
मैं कविता नहीं लिखती हूं, मुझे लगता है कि कविता लिखना एक बहुत कठिन काम है. कविता पढ़ने और सुनने में अवश्य मेरी रूचि है. इसके अलावा मैं प्रेमचंद और अन्य लेखकों को भी पढ़ती हूं.
प्रश्न4 एक लेखक, कवि, पुरातत्ववेत्ता की जीवन संगिनी होने को आप किस तरह से महसूस करती है?
मुझे गर्व महसूस होता है. शरद जी बताते हैं कि जब वे पुरातत्त्व पढ़ रहे थे तब उनके गुरूजी डॉ वाकणकर कहते थे कि तुम पुरातत्त्व के छात्रों का दाम्पत्य जीवन बड़ा सुखी रहेगा क्योंकि जैसे-जैसे पत्नी पुरानी होती जाएगी प्रेम बढ़ता जाएगा. मुझे खुशी होती है जब उनकी कविताओं को लोग सोशल मीडिया आदि पर पढ़ते और सुनते हैं. कुछ लोगों ने उनकी कविताओं को गाया भी है तथा नाट्य मंचन के रूप में प्रस्तुत किया है. मैं जब उनकी कविताओं को पत्रिकाओं में पढ़ती हूं और उन पर चर्चा होते देखती हूँ तब खुशी का ठिकाना नहीं रहता है. उनकी पुस्तक मन मशीन, एक पुरातत्त्ववेत्ता की डायरी, कविता संकलन गुनगुनी धूप में बैठक ,हमसे तो बेहतर हैं रंग, अनकही, सुख एकम दुःख तथा लम्बी कविता पुरातत्त्ववेत्ता और देह बहुत चर्चित है.