महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और एसआईआर के क्लिष्ट नियम
मनीषा तिवारी
पिछले दिनो जाने माने राजनीतिक विश्लेषक श्री योगेंद्र यादव और श्री राहुल शास्त्री का द इंडियन एक्सप्रेस अखबार मे एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था “SIR could roll back decades of progress in women’s political participation”. यह स्तंभ विषेशरूप से विशेष गहन परीक्षण के कारण महिला मतदाताओं पर होने वाले प्रभावों पर केन्द्रित है जिसमे स्तंभकारों ने निर्वाचन आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त करते हुए महिला मतदाताओं के राजनीतिक भागीदारी मे दशकों मे हुई प्रगति पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों की व्याख्या करते हुए कहा है कि वर्तमान SIR मे लागू नियम महिलाओं के लिए असमान परिणाम ला सकते हैं.
उन्होने बताया है कि SIR प्रक्रिया मे बहुत सारी महिलाएं अनुपस्थित/स्थानांतरित के रूप मे चिन्हित हो गयी हैं जिससे उनके नाम मतदाता सूची से हटाये जा रहे हैं,और यह विशेषकर उन विवाहित महिलाओं के साथ अधिक हो रहा है जिनके नाम उनके माता-पिता के घर पर बनी मतदाता सूची मे तो थे लेकिन विवाह के पश्चात उनके नाम उनके वैवाहिक घर मे नहीं जोड़े गए. रिपोर्ट मे यह भी बताया गया कि पिछले दो दशकों से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, नामांकन और मतदान मे क्रमिक वृद्धि हुई थी लेकिन SIR के बाद यह वृद्धि पीछे हट सकती है. उन्होने बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों मे SIR के बाद मतदाताओं के जारी किए गए कुल आकड़ों का अध्ययन करते हुए बताया कि उक्त राज्यों मे महिला मतदाताओं की संख्या मे लगभग 23 लाख की कमी आयी है एवं महिला और पुरुष मतदाताओं का लिंगानुपात घटकर प्रति 1000 पुरुषो पर 963 महिला का रह गया हैं, जबकि SIR के पूर्व यह अनुपात प्रति 1000 पुरुष मतदाता पर 979 महिला मतदाताओं का था.

जहां तक छत्तीसगढ़ की बात है वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पूर्व निर्वाचन आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 20,360,240 थी जिनमे 10,239,410 महिलाएं और 10,120,040 पुरुष तथा 790 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल थे. साथ ही यह भी बताया गया कि 18 से 19 वर्ष की आयु के 7,23,77 मतदाता प्रथम बार नवंबर 2023 के असेंबली चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने जा रहे थे. अतः छत्तीसगढ़ राज्य मे महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं की संख्या से अधिक देखी गयी थी .
हालांकि छत्तीसगढ़ मे निर्वाचन आयोग ने वर्तमान मे SIR की प्राथमिक प्रक्रिया पूर्ण कर ली है तथा दावा आपति के लिए मतदाताओं को 22 जनवरी 2026 तक का समय दिया गया है. वर्तमान मे निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य के कुल मतदाताओं की समेकित सूची जारी किया जाना शेष है, जबकि जिलेवार एवं विधानसभा/लोकसभावार मतदाता सूची ईसीआई के वैबसाइट से देखी जा सकती है.
यहाँ उक्त राज्यों से सबक लेते हुए यह आवश्यक है कि निर्वाचन आयोग और हम नागरिक दोनों ही अपने मताधिकार को बनाए रखने के लिए अपने-अपने स्तर से आवश्यक प्रयास करें ताकि छत्तीसगढ़ मे पूर्व के वर्षों की तरह ही अधिक से अधिक महिला मतदाता लोकतन्त्र मे अपने मतो के अधिकार का प्रयोग कर सकें. इसके लिए एक ओर निर्वाचन आयोग की ज़िम्मेदारी है कि वह महिलाओं को फोटो सहित अन्यूमिरेशन फॉर्म भरने मे यथा संभव मदद दे, आवश्यक सहूलियत और समय दे, वहीं हम नागरिकों की ज़िम्मेदारी है कि हम नए पते पर अपने नाम को जुड़वाने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाओं पर ध्यान दें.
यहाँ यह भी दर्ज किया जाना अति आवश्यक है कि वर्तमान मे संचालित SIR की सभी प्रस्तावित प्रक्रियाओं का अनुसरण करते हुए भी बमुश्किल ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाएं अपने माता-पिता के घर 2003 की मतदाता सूची को खँगालने जा सकेगी, अपनी दौड़ भाग भरी जिंदगी से समय निकाल कर बीएलओ के समक्ष लाइन लगा सकेगी, बमुश्किल से घर चलाने वाली कमाई से फोटो और ऑटो का खर्च निकाल सकेंगी और अपने पति व सास ससुर से अपने वर्तमान निवास की मतदाता सूची मे नाम दर्ज करवाने की बहस मे शामिल हो सकेंगी तथा मतदाता होने दावा साबित कर पाएँगी.
इंडियन एक्सप्रेस मे प्रकाशित योगेंद्र यादव व राहुल शास्त्री के स्तंभ से प्रेरित