
रायगढ़। खरसिया थाना क्षेत्र में एक प्रधान पाठक के नाम से 20 लाख 76 हजार रुपये का लोन निकालकर धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने बताया कि शुरुआत में लोन लेने और किश्तों का भुगतान करने की पूरी जिम्मेदारी लेने के भरोसे उसने अपने आवश्यक दस्तावेज साझा किए, लेकिन बाद में आरोपी ने सभी लोन किश्तों का भुगतान रोक दिया।
जांच में पता चला कि आरोपी ने पीड़ित के दस्तावेजों का उपयोग करके विभिन्न बैंकों से लोन फॉर्म भरे। इसमें चोला मंडलम शाखा से 6.40 लाख रुपये, ICICI बैंक शाखा से 4 लाख रुपये, एक्सिस बैंक शाखा से 6.65 लाख रुपये और स्टेट बैंक शाखा कोड़ातराई से 10.20 लाख रुपये का लोन शामिल था। प्रोसेसिंग चार्ज, इंश्योरेंस और अन्य कटौतियों के बाद कुल 20 लाख 76 हजार रुपये पीड़ित के खाते में जमा हुए।
शुरुआती दो-तीन महीनों तक लोन की किश्तें नियमित रूप से चुकाई गईं, लेकिन इसके बाद आरोपी ने किश्तों का भुगतान बंद कर दिया। इससे पीड़ित आर्थिक रूप से परेशान हो गया और उसने मंगलवार को खरसिया थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
यह मामला वित्तीय धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर ध्यान आकर्षित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले पूरी सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। किसी भी व्यक्ति को पर्सनल डॉक्यूमेंट्स, बैंक डिटेल्स या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले सभी कानूनी और बैंकिंग प्रक्रिया सुनिश्चित करना चाहिए।
नगर प्रशासन और पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में तुरंत शिकायत दर्ज कराना और कानूनी प्रक्रिया अपनाना ही सुरक्षित तरीका है। इसके अलावा, लोगों को चाहिए कि वे किसी भी वित्तीय लेन-देन में भरोसेमंद स्रोतों और आधिकारिक चैनलों का ही इस्तेमाल करें।
इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी के मामलों में सतर्कता और जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। नागरिकों को अपने दस्तावेज सुरक्षित रखने और किसी भी संदिग्ध लेन-देन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इस तरह की जागरूकता से वित्तीय अपराधों को रोकने में मदद मिल सकती है।