Ambikapur News : हिंगोरा सिंह, अम्बिकापुर: सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुन्नी में अव्यवस्थाओं और इलाज के अभाव में एक 6 माह की विशेष संरक्षित जनजाति की मासूम बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए बहाने ढूंढ रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यदि बच्ची को सही समय पर डॉक्टर और उपचार मिल गया होता, तो आज वह जीवित होती।
2 घंटे तक डॉक्टर का इंतजार, निजी क्लीनिक ले जाने की नौबत
पूरा मामला लखनपुर विकासखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुन्नी का है। ग्राम लब्जी कुर्मेनपारा निवासी संत राम श्रोता मझवार की 6 माह की बच्ची, अमीषा मझवार, पिछले दो दिनों से बीमार थी और दूध नहीं पी पा रही थी। शनिवार, 27 दिसंबर 2025 की सुबह 10 बजे परिजन उसे लेकर कुन्नी अस्पताल पहुंचे। वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर देव कुमार साहू मौजूद नहीं थे। परिजनों ने 2 घंटे तक डॉक्टर का इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं आया। थक-हारकर परिजन बच्ची को गांव के ही एक निजी क्लीनिक ले गए, जहां डॉक्टर ने गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत अम्बिकापुर ले जाने की सलाह दी।
देर से मिली एम्बुलेंस, मेडिकल कॉलेज में मृत घोषित
निजी क्लीनिक से सलाह मिलने के बाद परिजन फिर से कुन्नी अस्पताल पहुंचे, जहां काफी मशक्कत और घंटों बीतने के बाद एम्बुलेंस की सुविधा मिली। बच्ची को अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मासूम को मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि नर्सों के भरोसे ही बच्ची का इलाज किया गया और सही समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण बच्ची की सांसें थम गईं।
डॉक्टर ने स्वीकार की गलती, बोले- ‘फोन पर दिया निर्देश’
इस संबंध में कुन्नी सीएचसी में पदस्थ इकलौते डॉक्टर देव कुमार साहू ने स्वीकार किया कि वह उस दिन किसी ‘अप्रिय कारण’ से अस्पताल नहीं पहुंच सके थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने फोन कॉल के माध्यम से स्टाफ को इलाज में सहयोग किया था। डॉक्टर ने यह भी माना कि अस्पताल में केवल एक ही डॉक्टर होने के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, सीएचसी प्रभारी आरएमए (RMA) विनोद भार्गव ने इस मामले में अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि वे छुट्टी पर थे और अब इस मामले की जांच कराएंगे।
एक डॉक्टर और 3 नर्सों के भरोसे सीएचसी कुन्नी
बता दें कि दो माह पहले ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुन्नी का उन्नयन कर इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बनाया गया है। लेकिन कागजों पर उन्नयन होने के बावजूद धरातल पर सुविधाएं शून्य हैं। वर्तमान में पूरा अस्पताल केवल 1 डॉक्टर और 3 स्टाफ नर्सों के भरोसे चल रहा है। संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी के कारण मरीजों को इलाज के बजाय सीधे रेफर कर दिया जाता है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बीएमओ को दी गई थी सूचना
घटना वाले दिन ही स्थानीय मीडिया कर्मियों ने लखनपुर बीएमओ डॉ. ओ.पी. प्रसाद को फोन के माध्यम से अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति और एम्बुलेंस न होने की जानकारी दी थी। बावजूद इसके, मासूम को समय पर इलाज नहीं मिल सका, जो पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।