महाशक्ति की ‘दादागिरी’ या वैश्विक षड्यंत्र? वेनेजुएला से लेकर भारत तक ‘डीप स्टेट’ के खतरनाक खेल का पर्दाफाश

वैश्विक विश्लेषण: दुनिया की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ लोकतंत्र और न्याय की आड़ में ‘शक्तिशाली’ राष्ट्र अपनी मर्जी थोप रहे हैं। अमेरिकी साम्राज्यवाद और उसके पीछे काम करने वाले ‘डीप स्टेट’ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जिसके पास ताकत है, वही नैरेटिव सेट करता है। वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम इसका सबसे ज्वलंत और डरावना उदाहरण है।

वेनेजुएला: तेल की लूट और ‘नोबेल’ का मुखौटा
वेनेजुएला, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार (303 अरब बैरल) का मालिक है, आज अमेरिकी साजिश का केंद्र बन चुका है। निकोलस मादुरो को ‘तानाशाह’ साबित करने के लिए एक सोची-समझी पटकथा लिखी गई। 2025 में एक गुमनाम विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार देना इसी साजिश का हिस्सा था, ताकि विपक्ष को वैश्विक सहानुभूति दिलाई जा सके।

ट्रंप प्रशासन द्वारा 2026 में सैन्य हस्तक्षेप कर मादुरो और उनकी पत्नी की ‘गिरफ्तारी’ असल में अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाने जैसा है। मादुरो का अपराध सिर्फ इतना था कि वे चीन, रूस और भारत जैसे देशों के साथ मिलकर अपनी अर्थव्यवस्था को स्वतंत्र बनाना चाहते थे, जो अमेरिका की तेल की भूख को बर्दाश्त नहीं हुआ।

बांग्लादेश का सत्ता पलट: एक कड़वा सबक
यही ‘डीप स्टेट’ मॉडल हमने 2024 में बांग्लादेश में देखा। शेख हसीना को सिर्फ इसलिए सत्ता से बेदखल कर दिया गया क्योंकि उन्होंने सेंट मार्टिन द्वीप पर अमेरिकी एयरबेस बनाने से मना कर दिया था। छात्र आंदोलनों की आड़ में सीआईए ने तख्तापलट कराया और अपने ‘कठपुतली’ मोहम्मद यूनुस को अंतरिम प्रमुख बना दिया। यह साफ दिखाता है कि अमेरिका को मानवाधिकारों की चिंता वहीं होती है जहाँ उसके रणनीतिक और आर्थिक हित टकराते हैं।

भारत के खिलाफ ‘इंटरनेशनल जाल’ और मोदी का प्रतिरोध
भारत भी इस ग्लोबल षड्यंत्र से अछूता नहीं है। डीप स्टेट ने भारत के भीतर अपने ‘मोहरे’ तैयार किए हैं। राहुल गांधी जैसे नेता विदेशों में जाकर भारत के लोकतंत्र को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। जर्मनी से लेकर कैम्ब्रिज तक, एक झूठा नैरेटिव फैलाया जा रहा है कि ‘भारत में लोकतंत्र खतरे में है’। हालिया खुलासे बताते हैं कि ये मोहरे ‘प्रोग्रेसिव एलायंस’ और जॉर्ज सोरोस जैसे भारत-विरोधी तत्वों से प्रेरित नेटवर्क्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

साजिश का ब्लूप्रिंट स्पष्ट है:

पहले अंतरराष्ट्रीय मीडिया और पुरस्कारों के जरिए एक नेता को ‘शांतिदूत’ बनाओ।

फिर आंतरिक अराजकता और मजहबी उन्माद फैलाकर देश को अस्थिर करो।

अंत में ‘शांति बहाली’ के नाम पर हस्तक्षेप कर अपनी कठपुतली सरकार बिठा दो।

निष्कर्ष: नरेंद्र मोदी—डीप स्टेट का सबसे बड़ा रोड़ा
दुनिया के इस खतरनाक खेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़े हैं। वे जानते हैं कि यदि दुनिया में अमेरिका के खिलाफ एक मजबूत वैकल्पिक ध्रुव खड़ा हो सकता है, तो वह भारत के नेतृत्व में ही संभव है। इसीलिए भारत को आंतरिक रूप से तोड़ने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है।

भू-राजनीति का इतिहास गवाह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति अक्सर युद्ध थोपकर अपनी महाशक्ति होने की पुष्टि करते हैं। अब समय आ गया है कि राष्ट्र अपनी संप्रभुता को बचाने के लिए एकजुट हों, अन्यथा ‘लोकतंत्र की रक्षा’ के नाम पर एक-एक कर हर देश को आग में झोंक दिया जाएगा।

(कुमोद चौधरी, समाज सेवक, कोलकाता)

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