अवैध शराब बना मौत का कारण, सिंधी कैंप और बाबा टोला में छह माह में 19 मौतों का दावा



जबलपुर। शहर के सिंधी कैंप और बाबा टोला क्षेत्र अवैध शराब से हो रही लगातार मौतों के कारण हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बीते छह महीनों में इन इलाकों में अवैध शराब के सेवन से 19 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात से नाराज क्षेत्रवासी प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। आरोप है कि यहां 10, 20, 30, 40 और 50 रुपए में पाउच और पन्नियों में शराब खुलेआम बेची जा रही है, जिसका सेवन करने से लोग जान गंवा रहे हैं।

सिंधी कैंप, बाबा टोला और बड़ी मदार टेकरी इलाके में कई ऐसे घर हैं, जहां अवैध शराब के कारण चार से पांच पुरुषों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन जहरीली शराब की बिक्री से इनकार कर रहा है।

क्षेत्र में रहने वाले कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अवैध शराब के चलते अपने परिजनों को खोया है। पीड़ित परिवारों की एक ही मांग है कि इलाके में चल रहे शराब के अड्डों को पूरी तरह बंद किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी इस जानलेवा नशे की चपेट में न आए। अवैध शराब का जिक्र आते ही उन महिलाओं की आंखें भर आती हैं, जिन्होंने अपने पति, बेटे, भाई और अन्य परिजनों को इस नशे के कारण खो दिया है।

जबलपुर के पूर्व विधानसभा क्षेत्र में आने वाले सिंधी कैंप, मदार टेकरी और बाबा टोला इलाकों में पिछड़े वर्ग की बड़ी आबादी निवास करती है। यहां लंबे समय से अवैध रूप से शराब बनाने और बेचने के ठिकाने सक्रिय बताए जा रहे हैं। जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा के अनुसार अवैध शराब बनाने में महुआ के साथ-साथ नौशादर और अन्य रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है।

स्वाद बढ़ाने और शराब को अधिक नशीला बनाने के लिए मिलाए जाने वाले ये रसायन शराब को बेहद घातक और जहरीला बना देते हैं। इस शराब के सेवन से सबसे अधिक असर लिवर पर पड़ता है। अत्यधिक सेवन से लिवर की कोशिकाओं पर दबाव बढ़ जाता है और धीरे-धीरे उसका बड़ा हिस्सा काम करना बंद कर देता है। आगे चलकर इसका असर किडनी और हड्डियों पर भी पड़ता है, जिससे शराब पीने वाला व्यक्ति गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है और यही स्थिति अंततः मौत का कारण बन जाती है।

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