राजकुमार मल
भाटापारा:- खुश हैं गमछा कारोबारी पखवाड़े पर पहले निकलती मांग को देखकर। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर पूरा ध्यान था। इसलिए अग्रिम भंडारण जैसी व्यवस्था काम आने लगी है। खरीदी का आंकड़ा इसलिए बढ़ने की संभावना है क्योंकि प्रति नग कीमत स्थिर है।
बीते बरस की गर्मी ने जो तेवर दिखाए थे, उसे देखकर गमछा बाजार इस बार बेहद सतर्क है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों पर गंभीरता से नजर रखने वाले गमछा बाजार ने इस वर्ष न केवल अग्रिम सौदे किए बल्कि सौदे में संख्या भी बढ़ा दी। अब काम आ रही है यह कवायद क्योंकि चिल्हर बाजार की मांग ने दस्तक दे दी है।
थोक पूरा, बारी चिल्हर की
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का पूर्वानुमान सच के करीब है। ध्यान था बीते बरस की गर्मी का। इसलिए गमछा बाजार ने फरवरी मध्य में ही गमछा बनाने वाली इकाइयों को ऑर्डर दे दिए थे। समय पर यह काम पूरा कर लिया गया है। अब बारी चिल्हर बाजार की है जिसकी मांग ने दस्तक दे दी है क्योंकि उपभोक्ता मांग चालू हो चुकी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र इस बार खरीदी को लेकर जोरदार रुझान दिखा रहा है।
Related News
कोरिया/सोनहत। पंचायत सचिवों ने अपने शासकीयकरण की मांग को लेकर विगत 17 मार्च से हड़ताल जारी रखी है। उनकी हड़ताल के चलते पंचायत के सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को म...
Continue reading
उत्पादन पर दिखेगा मौसम का असर
राजकुमार मल
भाटापारा। 4200 से 4300 रुपए क्विंटल। महुआ में नई फसल की यह कीमत भविष्य मे तेजी की धारणा को मजबूत कर रही है क्योंकि तैयार फसल पर मौसम की ...
Continue reading
कोरिया/सोनहत। पंचायत सचिवों का अनिश्चितकालीन हड़ताल आज आठवे दिन में प्रवेश कर गई है। सचिवों ने अपनी एकमात्र मांग, नियमितीकरण को लेकर आज सुंदरकांड का पाठ किया। उनका कहना है कि उनकी ...
Continue reading
घरेलू मांग में जबर्दस्त गिरावट
राजकुमार मल
भाटापारा। लाभ तो दूर, अब लागत की वापसी की चिंता में है मावा बाजार क्योंकि घरेलू उपभोक्ता मांग नहीं के बराबर देखी जा रही है। इसलिए 280 स...
Continue reading
नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शेयर बाजार में रिकॉर्ड गिरावट के कारण मचे कोहराम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि छोटे निवेशकों...
Continue reading
आज के समय में यूरिक एसिड एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुका है, जो मुख्य रूप से हमारे जीवनशैली और खानपान से जुड़ी हुई है। जब हम ज्यादा तला-भुना, मीठा या मैदा से बनी चीजों का सेवन करत...
Continue reading
असर लड्डू-पापड़ी के बाजार पर
राजकुमार मल
भाटापारा। भरपूर मांग ने लाई और मुरमुरा बाजार में दस्तक दे दी है। तेज कीमत के बावजूद लाई में जैसी मांग निकल रही है, उसमें होलसेल काउंटर ह...
Continue reading
बढ़ रही लागत, घट रहा लाभ
राजकुमार मल
भाटापारा। 22 नवंबर से पोहा मिलों का संचालन बंद। लंबे समय से चल रहे विचार पर आखिरकार फैसला ले लिया गया।
पोहा मुरमुरा निर्माता कल्याण समिति ...
Continue reading
जलगढ़ में अब प्रति सोमवार को लगेगा हाट बाजार
सरायपाली। क्षेत्रीय विधायक चातुरी नंद ने ग्राम जलगढ़ में साप्ताहिक हाट बाजार का फीता काटकर उद्घाटन किया।
विधायक नंद ने सर्वप्रथम शुभ ...
Continue reading
धान विष्णुभोग, सियाराम और एचएमटी का रकबा कम हुआ
राजकुमार मल
भाटापारा। बारीक चावल के उपभोक्ता तैयार रहें तेजी के लिए। यह स्थिति पूरे साल बने रहने के प्रबल आसार हैं क्योंकि बारीक ...
Continue reading
अब 10 ग्राम 78,136 रुपए में मिलेगा
नई दिल्ली। सोना और चांदी के दाम बुधवार को कम हुए हैं। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 430 रुपए कम होकर 78,136 रुपए हो गई है। मंगलवार को इसकी कीमत...
Continue reading
-सुभाष मिश्रराष्ट्रपति देश का सर्वोच्च पद होता है, इस पर महामहिम द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं। ऐसे में अगर वह छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य में जाती है और वहां 2 दिन का समय बिताती हैं। ...
Continue reading
समय से पहले मांग
ग्रीष्मकाल में मार्च के दूसरे सप्ताह से गमछा में खरीदी निकलती थी। इस बार डिमांड ने मध्य फरवरी में ही दस्तक दे दी। अनुमान पहले से ही थी डिमांड की इसलिए गमछा बाजार ने अग्रिम सौदे और भंडारण पहले से ही किया हुआ था। तैयारी काम आ रही है। जैसी डिमांड निकल रही है वह प्रमाणित कर रही है कि जून अंत तक यह स्थिति बनी रह सकती है। बाद के दिनों के लिए छतरियां और रेनकोट की तैयारी की योजना है।
इसलिए 25 फ़ीसदी बढ़ेगी
न्यूनतम 35 रुपए प्रति नग। अधिकतम 150 रुपए प्रति नग। बीते साल की यह कीमत इस बार भी गमछा में बनी हुई है। गर्मी और डिमांड को देखते हुए स्थिर कीमत गमछा बाजार में 25 से 30 फीसदी की वृद्धि ला सकती है। इसके अलावा ग्रामीण बाजार की जैसी मांग निकल रही है, उससे भी वृद्धि की इस धारणा को बल मिल रहा है। इसलिए गमछा बाजार आंध्र प्रदेश की गमछा बनाने वाली इकाइयों से संपर्क बढ़ाए हुए हैं।