Chhattisgarh 108 ambulance failure : रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं के दावों की पोल खोलने वाली एक दुखद तस्वीर सामने आई है। एंबुलेंस के लिए 11 बार कॉल करने के बावजूद मदद नहीं पहुंची, जिसके चलते परिजनों को 20 वर्षीय गंभीर मरीज को मालवाहक वाहन से एम्स अस्पताल ले जाना पड़ा। हालांकि, इलाज के दौरान रविवार सुबह युवक ने दम तोड़ दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, बोरियाखुर्द निवासी 20 वर्षीय प्रवीण कुमार की शनिवार रात करीब 8 बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई और उनके पूरे शरीर में तेज दर्द होने लगा। मरीज के रिश्तेदार लक्ष्मी नारायण नागरची ने तत्काल 108 पर कॉल किया, जिसे 112 डायल सेवा में ट्रांसफर कर दिया गया। परिजनों ने मरीज की गंभीर स्थिति बताते हुए तुरंत एंबुलेंस भेजने का अनुरोध किया।
आश्वासन मिलने के बाद जब एंबुलेंस नहीं आई, तो परिजनों ने रात 8 से 8.30 बजे के बीच लगातार 11 बार कॉल किए, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। स्थिति बिगड़ती देख परिजनों ने पहले युवक को स्कूटी पर ले जाने की कोशिश की, पर अत्यधिक दर्द के कारण वह बैठ नहीं सका। आखिरकार, परिजन उसे एक मालवाहक वाहन में लादकर रायपुर एम्स पहुंचे। डॉक्टरों के मुताबिक युवक के फेफड़ों में गंभीर संक्रमण था। रविवार सुबह करीब 9:30 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
500 करोड़ के बजट पर उठे सवाल प्रदेश भर में आपातकालीन एंबुलेंस, फायर और पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए ‘डायल 112’ का संचालन जीवीके (GVK) संस्था द्वारा किया जाता है। इस सेवा पर हर साल सरकार 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करती है। इसके बावजूद राजधानी के भीतर आधे घंटे तक एंबुलेंस न पहुंच पाना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस लापरवाही के संबंध में जब डायल 112 के एसपी गोपीचंद मेश्राम से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।