शनिवार को सिर पर तेल लगाने की भूल पड़ सकती है भारी, पद्म पुराण में दर्ज हैं ये सख्त नियम

शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफलदाता कहा गया है, जो मनुष्य को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। शनि देव की पूजा-अर्चना के कुछ बेहद सख्त और विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन न करने पर व्यक्ति को प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। पद्म पुराण के उत्तराखंड में शनि देव की पूजा से जुड़े नियमों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

पद्म पुराण के अनुसार, शनिवार के दिन शनि देव पर सरसों का तेल और काले तिल चढ़ाने का विशेष महत्व है, लेकिन इस दिन खुद के सिर पर तेल लगाना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। विशेषकर जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही हो, उन्हें शनिवार को भूलकर भी सिर में तेल नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में मानसिक तनाव, बनते कार्यों में रुकावटें और गंभीर आर्थिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

किन लोगों के लिए शनिवार को तेल लगाना है वर्जित?
साढ़ेसाती और ढैया से पीड़ित जातक: वर्तमान समय में जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव चल रहा है, उन्हें शनिवार के दिन सिर में तेल लगाने से बचना चाहिए। ज्योतिषीय मान्यता है कि इस दौरान सिर पर तेल लगाने से शनि का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है।

सप्तमी तिथि में जन्मे लोग: जिन जातकों का जन्म किसी भी माह की सप्तमी तिथि को हुआ हो और उन पर शनि की महादशा चल रही हो, उनके लिए भी शनिवार को सिर पर तेल लगाना नुकसानदेह साबित हो सकता है। शास्त्रानुसार सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य देव हैं। सूर्य और शनि के बीच पिता-पुत्र का संबंध होने के बावजूद शत्रुता का भाव रहता है, इसलिए इस दिन सूर्य और शनि के विपरीत नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

दान-पुण्य करने वाले श्रद्धालु: जो श्रद्धालु शनिवार के दिन शनि दोष की शांति के लिए तेल, काले तिल, उड़द की दाल या लोहे की वस्तुओं का दान करते हैं, उन्हें भी स्वयं शनिवार को सिर पर तेल नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से दान का शुभ फल प्रभावित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *