अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच उन्होंने देश में बाहर से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी आयात शुल्क लगाने की घोषणा कर दी है। इस नए आदेश के बाद दुनिया भर के दवा बाजार में हलचल तेज हो गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अमेरिका में बाहर से आने वाली ये दवाएं अगले दो साल तक बिना किसी टैक्स के आती रहेंगी। इसके बाद साल 2028 से इन पर भारी शुल्क वसूला जाना शुरू हो जाएगा। पहले साल टैक्स की दर सौ प्रतिशत होगी और उसके बाद इसे बढ़ाकर दो सौ प्रतिशत तक कर दिया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य दवा बनाने का पूरा काम देश के भीतर ही शुरू कराना है।
जो विदेशी कंपनियां तय समय सीमा के भीतर अमेरिका में अपने नए प्लांट नहीं लगाएंगी, उन पर कड़ा आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि पेटेंट वाली और नई ब्रांडेड दवाओं पर इस नीति का कोई असर नहीं पड़ेगा। ट्रंप का कहना है कि इस कदम से देश के लोगों की सुरक्षा मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ना तय माना जा रहा है। भारत दुनिया भर में जेनेरिक दवाओं का एक बहुत बड़ा सप्लायर है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली कुल ऐसी दवाओं का लगभग चालीस प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से ही भेजा जाता है। भारत के पास बड़ी संख्या में ऐसी निर्माण इकाइयां हैं जिन्हें अमेरिकी संस्था से मंजूरी मिली हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सरकार का यह अल्टीमेटम विदेशी दवा कंपनियों को घरेलू बाजार में निवेश करने के लिए मजबूर करने के लिए है। अगर भारतीय कंपनियां समय रहते अमेरिकी जमीन पर अपने प्लांट नहीं लगाती हैं, तो उन्हें भारी टैक्स का सामना करना पड़ सकता है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय दवाओं की कीमतें भी काफी बढ़ जाएंगी और कारोबार प्रभावित होगा।