छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए शिक्षक (टीचर) बनने की राह अब और भी आसान और सुव्यवस्थित होने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEET/NEP) के तहत राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड (B.Ed) कोर्स शुरू करने का फैसला किया है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, छात्र स्कूली शिक्षा (12वीं) पूरी करने के तुरंत बाद सीधे शिक्षक बनने की इस विशेष ट्रेनिंग में दाखिला ले सकेंगे।
पुरानी बनाम नई व्यवस्था: क्या बदलेगा?
अब तक राज्य में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद 2 साल का बीएड करने का नियम था, लेकिन नई व्यवस्था इसे पूरी तरह बदल देगी:
| विशेषता | पुरानी व्यवस्था | नई इंटीग्रेटेड व्यवस्था |
| प्रवेश योग्यता | ग्रेजुएशन (स्नातक) के बाद | 12वीं (हायर सेकेंडरी) के बाद सीधे |
| कोर्स की अवधि | 3 साल ग्रेजुएशन + 2 साल बीएड (कुल 5 साल) | संयुक्त रूप से केवल 4 साल |
| फायदा | छात्रों का 1 साल अतिरिक्त खर्च होता था | समय की बचत और शुरुआत से ही शिक्षक बनने की सटीक ट्रेनिंग |
सरकार की जमीनी तैयारी: दुर्ग संभाग से होगी शुरुआत
इस ऐतिहासिक बदलाव को धरातल पर उतारने के लिए उच्च शिक्षा विभाग पूरी गंभीरता से काम कर रहा है:
- टास्क फोर्स का गठन: नए पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है। यह टीम कॉलेजों में जरूरी संसाधनों, लैब, लाइब्रेरी और प्रोफेसरों की उपलब्धता का आकलन कर रही है।
- पहले चरण में दुर्ग संभाग: योजना के पहले चरण के तहत दुर्ग संभाग के चुनिंदा सरकारी कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
- 13 सरकारी कॉलेजों में शुरुआत की योजना: प्रदेश के 13 प्रमुख सरकारी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के अध्ययनशालाओं में इसे शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
बड़ा फायदा: वर्तमान में छत्तीसगढ़ के किसी भी सरकारी या निजी कॉलेज में 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स उपलब्ध नहीं है। सरकारी कॉलेजों में इस पाठ्यक्रम के शुरू होने से गरीब और मध्यम वर्ग के मेधावी छात्रों को बेहद कम फीस पर बेहतरीन शिक्षक प्रशिक्षण मिल सकेगा।