आज आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, जिसे धार्मिक दृष्टिकोण से ‘अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी’ के रूप में बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर आज सौर ऊर्जा से भरपूर ‘रवि योग’ का एक दुर्लभ और बेहद फलदायी संयोग भी बन रहा है, जिसने आज के दिन के आध्यात्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा दिया है।
अजेय स्वरूप ‘अनिरुद्ध’ की होगी आराधना शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन भगवान गणेश के ‘अनिरुद्ध’ रूप की विशेष पूजा की जाती है। ‘अनिरुद्ध’ शब्द का अर्थ है जिसे रोका न जा सके या जो हमेशा अजेय रहे। मान्यता है कि आज के दिन बप्पा के इस स्वरूप की सच्ची श्रद्धा से पूजा करने वाले भक्तों के मार्ग में आने वाली बड़ी से बड़ी बाधाएं पल भर में दूर हो जाती हैं और उन्हें मनचाही सफलता हासिल होती है।
पूजा के लिए मिलेंगे 2 घंटे 45 मिनट: नोट करें शुभ मुहूर्त विनायक चतुर्थी पर गणपति जी की पूजा हमेशा दोपहर के समय यानी मध्याह्न काल में की जाती है क्योंकि इसी काल में बप्पा का प्राकट्य हुआ था।
- पूजा का शुभ समय: आज सुबह 11 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर दोपहर 01 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
- आराधना के लिए श्रद्धालुओं को कुल 2 घंटे और 45 मिनट का विशेष समय मिलेगा।
भूलकर भी न करें चंद्र दर्शन विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना जाता है। आज सुबह 08 बजकर 37 मिनट से लेकर रात को 09 बजकर 33 मिनट तक चंद्र दर्शन पूरी तरह वर्जित रहेगा, इसलिए इस समय अवधि में आकाश की ओर देखने से बचें।
कैसे करें आज पूजा? (सरल विधि) प्रातःकाल स्नान के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और घर के मंदिर की सफाई करें। गणेश जी की मूर्ति के समक्ष दीप जलाएं और उन्हें उनका सबसे प्रिय दूर्वा (दूब घास), लाल फूल, सिंदूर, अक्षत और मोदक या लड्डू अर्पित करें। इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते हुए गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर से बप्पा की आरती उतारकर प्रसाद वितरित करें।