कोरिया, 16 जुलाई 2026/ जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल मिशन के निर्देशानुसार कोरिया जिले में एक अनूठी पहल की शुरुआत होने जा रही है। गिरते भूजल स्तर को सुधारने और वर्षा जल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जिले में ‘कैच द रेन-सेल्फी या रील प्रतियोगिता’ का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने इस अभियान के जरिए जिलेवासियों से पानी की हर बूंद को सहेजने और इसे नई पीढ़ी के लिए सुरक्षित करने की भावुक अपील की है।
इस प्रतियोगिता के तहत नागरिक अपने घर, खेत, स्कूल या कार्यस्थल पर किए गए वॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज पिट और जल संरक्षण के प्रयासों को 30 से 90 सेकंड की रील या सेल्फी के माध्यम से दुनिया के सामने रख सकते हैं। प्रतिभागियों को अपनी प्रविष्टियां #CatchTheRain हैशटैग के साथ अपने सोशल मीडिया हैंडल (X, फेसबुक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब) पर पोस्ट करनी होंगी और राष्ट्रीय जल मिशन के आधिकारिक हैंडल (@nwmgoi) को टैग या कोलैब करना अनिवार्य होगा।
डिजिटल क्रांति से जल क्रांति की ओर: रचनात्मकता से बदलेगी पानी की किस्मत
यह प्रतियोगिता केवल एक मुकाबला नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया की ताकत के जरिए जल संरक्षण को एक बड़ा जनआंदोलन बनाने की कोशिश है। प्रशासन का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी रील और रचनात्मक वीडियो के माध्यम से समाज को अधिक प्रभावी ढंग से प्रेरित कर सकती है। प्रतियोगिता में पूरी तरह से मौलिकता को महत्व दिया जाएगा ताकि लोग अपने वास्तविक प्रयासों को साझा करें। इसके लिए हिंदी, अंग्रेजी या किसी भी क्षेत्रीय भाषा का उपयोग किया जा सकता है, बशर्ते क्षेत्रीय भाषा के वीडियो में अंग्रेजी सबटाइटल जुड़े हों। बिना तय हैशटैग के पोस्ट की गई प्रविष्टियों को अमान्य माना जाएगा, इसलिए नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
सामूहिक संकल्प की जरूरत: ‘जल है तो कल है’ को धरातल पर उतारने की तैयारी
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि पानी की एक-एक बूंद को सहेजना अब केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि यह समय की सबसे बड़ी मांग और हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी बन चुकी है। उन्होंने जिलेवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि अब सिर्फ पानी बचाने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित करने का समय है। जब समाज का हर व्यक्ति वॉटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर जल संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी ‘जल है तो कल है’ का सपना सच हो पाएगा।