नई दिल्ली। हिंदू धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में से सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। शादी की रस्में केवल परंपरा नहीं हैं, बल्कि ये पति-पत्नी के रिश्ते की नींव होती हैं। इनमें से एक सबसे पवित्र रस्म है पाणिग्रहण संस्कार। यह रस्म दूल्हा और दुल्हन के बीच एक ऐसे बंधन को दर्शाती है जो कई जन्मों तक चलने की कामना के साथ किया जाता है।
क्या है पाणिग्रहण संस्कार का अर्थ
पाणिग्रहण का सरल अर्थ होता है हाथ थामना। इस रस्म में पाणि का मतलब है हाथ और ग्रहण का मतलब है स्वीकार करना। शादी के मंडप में दुल्हन दूल्हे के दाहिनी ओर बैठती है। फिर दूल्हा अपने दाहिने हाथ से दुल्हन का हाथ थामता है।
भरोसे और सम्मान का प्रतीक
हाथ थामने की यह रस्म केवल एक दिखावा नहीं है। यह दूल्हे की ओर से दुल्हन को दिए जाने वाले भरोसे का प्रतीक है। हाथ थामते हुए दूल्हा वचन देता है कि वह अपनी पत्नी का हमेशा सम्मान करेगा और उसे हर हाल में खुश रखेगा। इसके बाद दूल्हा और दुल्हन पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर फेरे लेते हैं।
रिश्ते की पवित्र शुरुआत
अग्नि के फेरे लेने के बाद दूल्हा एक विशेष मंत्र का उच्चारण करता है। यह मंत्र उनके आपसी जुड़ाव और एक-दूसरे के प्रति कर्तव्य को परिभाषित करता है। यह रस्म पति-पत्नी के बीच एक ऐसी साझेदारी को जन्म देती है, जिसमें दोनों एक-दूसरे का सहयोग करने और जीवन के हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं। पाणिग्रहण संस्कार के बाद ही शादी की प्रक्रिया को पूर्ण माना जाता है।
