श्रद्धा वॉकर मर्डर केस लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में जब अदालत ने आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को परीक्षा के लिए एक दिन की राहत दी, तो सवाल उठने लगे कि क्या इस केस की सुनवाई जानबूझकर टाली जा रही है। लोगों के मन में यह बात घर कर गई है कि क्या आरोपी की मांगों की वजह से केस का ट्रायल धीमा हो गया है।
हकीकत कुछ और है
इंडिया टुडे के पास मौजूद अदालत के आदेशों की पड़ताल करने पर एक अलग तस्वीर सामने आती है। अदालत के रिकॉर्ड बताते हैं कि सुनवाई के दौरान जज ने हर बार मामले को जल्दी निपटाने पर ही जोर दिया है। अदालत ने कई बार बचाव पक्ष की तरफ से बार-बार समय मांगने की कोशिशों पर कड़ी आपत्ति जताई है।
तीन जजों के सामने चल रही है सुनवाई
इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई अब तक 3 अलग-अलग जजों की देखरेख में हुई है। हर स्तर पर अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि कार्यवाही में देरी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कई मौकों पर तो बचाव पक्ष को गवाहों से सवाल-जवाब करने के लिए आखिरी चेतावनी भी दी गई है।
अदालत का कड़ा रुख
अदालत ने अपने कई आदेशों में साफ लिखा है कि सुनवाई में अनावश्यक देरी की जा रही है। गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो, इसके लिए अदालत लगातार तारीखें तय करती रही है। इतना ही नहीं, अदालत ने आरोपी आफताब पूनावाला की एक अर्जी को भी सिरे से खारिज कर दिया था। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि न्यायपालिका इस केस को तय समय के भीतर पूरा करने के लिए अपनी तरफ से पूरी सख्ती बरत रही है।
