छात्रों-युवाओं के आंदोलन के समर्थन में उतरी शिवसेना, शिक्षा मंत्री से मांगा इस्तीफा

सोनम वांगचुक के आंदोलन को शिवसेना का समर्थन, निष्पक्ष मीडिया और जनसमर्थन की अपील

छात्रों-युवाओं के आंदोलन के समर्थन में शिवसेना, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

भानुप्रतापपुर। दुर्गुकोंदल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) इकाई ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, नीट परीक्षा विवाद तथा इससे प्रभावित छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने आरोप लगाया कि लगातार हो रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से देश के लाखों विद्यार्थियों और बेरोजगार युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है तथा कई छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन परिस्थितियों को गंभीर बताते हुए शिवसेना ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि दिल्ली में विभिन्न संगठनों द्वारा छात्रों एवं युवाओं के मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन तथा पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के धरना-प्रदर्शन को पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने समर्थन दिया है। शिवसेना ने कहा कि वह सोनम वांगचुक तथा आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों की मांगों के साथ खड़ी है। हालांकि संगठन ने सोनम वांगचुक के लगातार अनशन पर चिंता व्यक्त करते हुए उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील भी की है। उनका कहना है कि देश और समाज को उनकी आवश्यकता है।

विज्ञप्ति में केंद्र सरकार पर छात्रों, युवाओं, किसानों, मजदूरों और बेरोजगारों के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है। संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनआंदोलनों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। साथ ही मीडिया से भी अपील की गई कि वह छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाए और समाज के सामने निष्पक्ष जानकारी प्रस्तुत करे।

शिवसेना ने अपने बयान में अतीत के विभिन्न जनआंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। संगठन ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, छात्रों, युवाओं, किसानों, मजदूरों एवं आम नागरिकों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने और जनहित के मुद्दों पर एकजुट होने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जनता की आवाज को सम्मान मिलना आवश्यक है तथा जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष संवाद और संवेदनशीलता समय की मांग है।

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