राहुल गांधी 20 दिन से हैं कहां? कांग्रेस की चुप्पी के बीच बदले कई कार्यक्रम



नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पिछले करीब 20 दिनों से किसी भी सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए हैं। उनकी यह लंबी गैरमौजूदगी अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी की ओर से उनकी अनुपस्थिति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, जबकि इस दौरान कांग्रेस के कई निर्धारित कार्यक्रमों में बदलाव और कुछ आयोजनों को स्थगित करना पड़ा है। ऐसे में राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है।


इन दिनों कांग्रेस देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रही है। इसी क्रम में पार्टी ने ‘छात्रों की गूंज’ नाम से देशव्यापी अभियान शुरू किया है, जिसके तहत राहुल गांधी को विभिन्न राज्यों में छात्रों के साथ संवाद करना था। इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम 15 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना में प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में इसे स्थगित कर दिया गया।


पार्टी सूत्रों के अनुसार, अब यही कार्यक्रम 17 जुलाई को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित किए जाने की तैयारी है। कार्यक्रम स्थल में इस बदलाव ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। कांग्रेस का कहना है कि अभियान जारी रहेगा, लेकिन राहुल गांधी की उपलब्धता के अनुसार कार्यक्रमों का नया कैलेंडर तैयार किया जा रहा है।


राहुल गांधी की गैरमौजूदगी को लेकर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का दावा है कि वह निजी विदेश यात्रा पर हैं। अब तक न तो कांग्रेस ने उनकी यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम जारी किया है और न ही राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेश प्रवास या उससे जुड़े किसी कार्यक्रम की जानकारी साझा की है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी भारत वापसी 12 जुलाई के आसपास होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन इस संबंध में भी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।


इस बीच पटना में प्रस्तावित कार्यक्रम को हटाए जाने के पीछे केवल राहुल गांधी की अनुपस्थिति ही नहीं, बल्कि बिहार कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाल ही में हुई संगठनात्मक बैठकों में प्रदेश इकाई के भीतर मतभेद और गुटबाजी खुलकर सामने आई थी। इसी वजह से नेतृत्व ने फिलहाल बड़े कार्यक्रम को बिहार से बाहर आयोजित करने का फैसला किया, ताकि अभियान का संदेश संगठनात्मक विवादों से प्रभावित न हो।


राहुल गांधी की अनुपस्थिति का असर कांग्रेस के अन्य कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार, 10 जुलाई को प्रयागराज में प्रस्तावित एक कार्यक्रम को भी स्थगित करना पड़ा। पार्टी अब राहुल गांधी की वापसी के बाद अभियान को नए सिरे से गति देने की रणनीति बना रही है और विभिन्न राज्यों में छात्रों तथा युवाओं के बीच संवाद कार्यक्रमों का नया शेड्यूल तैयार किया जा रहा है।


राहुल गांधी पिछले कुछ वर्षों में संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष की राजनीति का सबसे सक्रिय चेहरा रहे हैं। संसद सत्र हो, चुनावी अभियान हो या सामाजिक और छात्र आंदोलनों से जुड़े कार्यक्रम, उनकी लगातार मौजूदगी कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। ऐसे में लगभग तीन सप्ताह तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से उनकी दूरी ने स्वाभाविक रूप से राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।


फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से राहुल गांधी की अनुपस्थिति, विदेश यात्रा या उनकी वापसी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में राजनीतिक नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से कब लौटते हैं और ‘छात्रों की गूंज’ अभियान समेत कांग्रेस के आगामी कार्यक्रमों में किस तरह सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

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