डर की वजह से सच छुपाते हैं मासूम; घर में गुस्से की जगह भरोसे का माहौल बनाना है जरूरी
हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा ईमानदार बने और कभी किसी बात पर झूठ न बोले। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि बच्चे डांट या सजा के डर से छोटी-छोटी बातों पर भी झूठ बोल देते हैं। ऐसे में पेरेंट्स परेशान हो जाते हैं कि बच्चों की इस आदत को कैसे सुधारें। इस संवेदनशील विषय पर मशहूर पेरेंटिंग कोच रिद्धि देवराह ने माता-पिता के लिए बेहद आसान और असरदार फॉर्मूला शेयर किया है, जिससे बच्चे बिना डरे खुद सच बोलना शुरू कर देंगे।
सीधे सवाल पूछना बच्चे को बनाता है झूठा
पेरेंटिंग कोच के अनुसार, जब भी घर में कोई नुकसान होता है या बच्चा कोई गलती करता है, तो ज्यादातर पेरेंट्स का पहला रिएक्शन गुस्से का होता है। वे तुरंत बच्चे पर हावी होकर पूछते हैं, ‘सच-सच बताओ, क्या तुमने ऐसा किया है?’ कोच का कहना है कि पूछने का यह तरीका ही बच्चे को सच बोलने से रोकता है। अचानक हुए इस हमले से बच्चा डर जाता है और खुद को बचाने के लिए तुरंत झूठ का सहारा ले लेता है।
गलती छुपाने के पीछे होता है सजा का खौफ
अक्सर जब बच्चे से कोई खिलौना टूट जाता है, फर्श पर जूस गिर जाता है या दीवारें गंदी हो जाती हैं, तो उसका पहला जवाब होता है— ‘मैंने नहीं किया’। पेरेंटिंग कोच बताती हैं कि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि बच्चा स्वभाव से झूठा है। असल में, उस वक्त बच्चे के दिमाग में सही-गलत का विचार नहीं चल रहा होता, बल्कि उसके अंदर सिर्फ इस बात का खौफ होता है कि सच बताते ही मम्मी-पापा गुस्सा करेंगे या उसे सजा देंगे। इसी डर के कारण वह झूठ बोल जाता है।
बदलें सवाल पूछने का अंदाज़: कोच की खास सलाह
अगर आप चाहते हैं कि बच्चा सच बोले, तो आपको अपनी पूछताछ का तरीका बदलना होगा:
- जासूस न बनें, दोस्त बनें: बच्चे से सीधे यह पूछने के बजाय कि ‘क्या तुमने यह तोड़ा है?’, बात को थोड़ा घुमाकर कहें— “अरे, लगता है यहाँ कुछ गड़बड़ हुई है, मुझे बताओ बेटा क्या हुआ था?”
- दबाव हटाएँ: जब आप इस तरह से बात करते हैं, तो बच्चे पर से मानसिक दबाव हट जाता है। उसे महसूस होता है कि आप उस पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, जिससे वह बिना डरे पूरी कहानी सच-सच बयां कर देता है।
डांटने के बजाय समाधान पर दें जोर
गलतियाँ हर बच्चे से होती हैं। अगर हर छोटी गलती पर सिर्फ चीखना-चिल्लाना या सजा मिलेगी, तो बच्चा अगली बार से अपनी गलतियों को और ज्यादा शातिर तरीके से छिपाना सीख जाएगा। समझदारी इसी में है कि पहले बच्चे की पूरी बात शांत होकर सुनें। उसके बाद उसे प्यार से समझाएं कि जो हुआ सो हुआ, लेकिन अगली बार इस बात का ध्यान कैसे रखना है।
घर को बनाएं ‘सेफ ज़ोन’
बच्चे हमेशा वहीं खुलकर अपनी बात रखते हैं, जहाँ उन्हें सुरक्षित महसूस होता है। घर का माहौल ऐसा होना चाहिए जहाँ बच्चा अपनी सबसे बड़ी गलती भी माता-पिता को बताने से न हिचकिचाए। जब बच्चे के मन से डांट का डर पूरी तरह निकल जाएगा और उसे आपके ऊपर भरोसा हो जाएगा, तो वह चाहकर भी कभी झूठ नहीं बोलेगा।