दिलीप गुप्ता
सरायपाली/बसना – ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो इस दुनिया से चले जाने के बाद भी अपने पीछे अपना प्रभावी इतिहास छोड़ जाते हैं।ऐसे ही छत्तीसगढ़ की अमर विश्व विख्यात पंडवानी गायिका,संगीत जगत की अमूल्य धरोहर,पद्मविभूषण से सम्मानित,अपनी मधुर आवाज और अद्भुत कला से पंडवानी को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को गौरवान्वित करने वाली डॉ. तीजन बाई के निधन पर वीणापाणि संगीत विद्यालय परिवार बस्ती सरायपाली ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।

विद्यालय के संचालक जन्मजय नायक ने कहा है छत्तीसगढ़ की मिट्टी की अमर सिंगार चली गई,पंडवानी की गूंजती बुलंद आवाज चली गई,तंबूरा पकड़ कर जो महाभारत को जीवंत कर दिया,आज हमारे बीच से तीजन बाई चली गई।तीजन बाई के रूप में छत्तीसगढ़ ने एक अनमोल धरोहर खो दी है।उनकी स्मृतियां सदा हमारे हृदयों में जीवित रहेगी।विद्यालय के प्राचार्य सुकनाथ चौहान ने तीजन बाई को स्मरण करते हुए कहा तीजन जी का प्रदर्शन ज्योंहि आरंभ होता उनका रंगीन फुंदनों वाला तानपुरा अभिव्यक्ति के अलग-अलग रूप ले लेता,कभी दु:शासन की बांह,कभी अर्जुन का रथ,कभी भीम की गदा तो कभी द्रोपदी के बाल में बदलकर,तानपुरा श्रोताओं को इतिहास के उस समय में पहुंचा देता जहां वे तीजन के साथ-साथ जोश,होश,क्रोध,दर्द उत्साह,उमंग और छल कपट की ऐतिहासिक संवेदना को महसूस करते।ऐसे कलाकार का चला जाना संगीत जगत के साथ-साथ हम सबके लिए अपूरणीय क्षति है।