कभी भी गिर सकता है यह हजार साल पुराना शिव मंदिर! बिना किसी जोड़ के खड़ा है ककनमठ, भूत-प्रेतों से जुड़ी हैं कहानियां

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया गांव में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जिसे पहली बार देखने पर कोई भी इंसान हैरत में पड़ सकता है। इस मंदिर का नाम ककनमठ मंदिर है। यह मंदिर बहुत ऊंचा और बेहद पतला दिखाई देता है। इसकी सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके पत्थर इस तरह एक-दूसरे के ऊपर टिके हुए हैं जैसे उन्हें बस बिना किसी मजबूत जोड़ या सहारे के रख दिया गया हो। दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि यह मंदिर तेज हवा के झोंके से भी कभी भी गिर सकता है। भगवान शिव को समर्पित इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण ग्यारहवीं शताब्दी में कच्छपघात वंश के राजा कीर्तिराज ने करवाया था। प्राचीन समय में यहां एक बहुत बड़ा मंदिर परिसर हुआ करता था, लेकिन आज सिर्फ यह मुख्य मंदिर ही खंडहरों के बीच खड़ा नजर आता है।

क्या सच में भूत-प्रेतों ने एक रात में खड़ा किया था यह ढांचा, जानिए क्या कहती हैं मान्यताएं

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी अद्भुत बनावट है। इस विशाल मंदिर को बनाने में कहीं भी सीमेंट, चूना, मिट्टी या किसी भी तरह के मसाले का इस्तेमाल नहीं किया गया है। बड़े-बड़े भारी पत्थरों को तराश कर बस एक के ऊपर एक सलीके से रख दिया गया है। आम भाषा में निर्माण की इस कला को ड्राई स्टोन तकनीक कहा जाता है, जिसका मतलब बिना किसी सानने वाले मसाले या सीमेंट के केवल पत्थरों के सही संतुलन पर पूरी इमारत खड़ी करना होता है। देखने में यह ढांचा भले ही बहुत कमजोर और ढीला-ढाला लगता है, लेकिन यह सदियों से बड़े-बड़े तूफानों और मौसम के थपेड़ों को झेलते हुए पूरी मजबूती से अपनी जगह पर अडिग है। इसकी इसी अजीब बनावट के कारण स्थानीय लोगों के बीच कई कहानियां और मान्यताएं मशहूर हैं।

इतिहासकारों का क्या है कहना, क्यों ऐसा दिखाई देता है यह मंदिर

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस मंदिर को इंसानों ने नहीं, बल्कि भूत-प्रेतों और अलौकिक शक्तियों ने मिलकर महज एक ही रात में बनाया था। कहानी के अनुसार रात भर ये अदृश्य ताकतें पत्थर जोड़कर मंदिर बना रही थीं, लेकिन जैसे ही सुबह की पहली किरण दिखी, वे काम अधूरा छोड़कर अचानक गायब हो गईं। हालांकि इतिहासकार इन भूत-प्रेतों वाली कहानियों से अलग राय रखते हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक समय के साथ इस मंदिर के आसपास के अन्य छोटे मंदिर और इमारतें नष्ट हो गईं, जिससे यह अकेला और अलग दिखने लगा। पहले यह मंदिर कड़े नियमों के तहत पंचायतन शैली में बना था, जिसका मतलब एक मुख्य बड़े मंदिर के चारों तरफ चार छोटे मंदिरों का होना होता है। भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बाकी सब टूट गए और सिर्फ मुख्य शिव मंदिर ही बच गया। हजार साल पुराना यह रहस्यमयी मंदिर आज भी सैलानी और खोजी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।

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