ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की सबसे बड़ी और पुण्यदायी मानी जाने वाली निर्जला एकादशी आज श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। शास्त्रों के अनुसार, साल भर की सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन और सर्वोच्च फल देने वाला माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ने बिना जल ग्रहण किए इस कठिन व्रत को पूर्ण किया था, जिसके कारण इसे ‘भीमसेनी एकादशी’ भी कहा जाता है। आज के दिन बिना पानी पिए भगवान श्री हरि विष्णु की विशेष आराधना करने से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है और असीम पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस व्रत का पारण अगले दिन यानी 26 जून को किया जाएगा।
पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ और शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना और द्रिक पंचांग के अनुसार, आज निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट से शुरू हो रहा है, जो दोपहर 02 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में की गई आराधना भक्तों को विशेष फल प्रदान करेगी।
इसके साथ ही आज दिन भर कई अद्भुत संयोग बने हुए हैं। सुबह 05 बजकर 25 मिनट से शुरू हुआ रवि योग शाम 04 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। वहीं, सुबह 10 बजकर 53 मिनट से देर रात तक बेहद फलदायी ‘सिद्ध योग’ का प्रभाव रहने वाला है, जिससे पहले शिव योग सक्रिय था। सबसे खास बात यह है कि आज गुरुवार और एकादशी का एक साथ दुर्लभ महासंयोग बना है, जिसे विष्णु आराधना के लिए अत्यंत चमत्कारी माना जाता है।
इस आसान विधि से करें श्री हरि की आराधना
- संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के बाद साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- स्थापना: पूजा घर में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- भोग: दोनों की संयुक्त पूजा करते हुए धूप, दीप जलाएं। भगवान को फल, पीले रंग की मिठाई और विशेष रूप से तुलसी दल डालकर खीर का भोग लगाएं।
- कथा व आरती: आसान पर बैठकर निर्जला एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें, विष्णु मंत्रों का जाप करें और अंत में पूरे परिवार के साथ भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की आरती उतारें।