राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के नक्सलाइट क्षेत्र बस्तर में वर्षों से पदस्थ पुलिस विभाग के तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को नक्सलाइट क्षेत्र से बाहर अभी तक नई पदस्थापना नहीं दी गई है। जबकि नीति के अनुसार नक्सलाइट क्षेत्र में पदस्थ पुलिस विभाग के तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को तीन से चार वर्ष की सेवा के पश्चात गैर नक्सलाइट क्षेत्र में पदस्थापना का प्रावधान है। ऐसे कर्मचारी अभी भी नक्सलाइट क्षेत्र से बाहर पदस्थापना के इंतजार में हैं।
उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका लगाने के बाद भी पुलिस विभाग के आश्वासन पर आश्वासन से परेशान बस्तर में तैनात पुलिस अधिकारियों का परिवार अब एक बड़ा कदम उठाने को मजबूर है। पुलिस मुख्यालय की ऐसी क्या मजबूरी है जो नक्सलवाद के पूर्ण रूप से खात्मा होने के बाद भी 10-11 सालों से पदस्थ निरीक्षक और उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को बस्तर से निकालने में इतना समय लगा रहे हैं।
उप निरीक्षक 2013 बैच के जवानों ने बस्तर में हथियारबंद नक्सलियों से लड़ते हुए अपनी शहादत दी है, जिसमें मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रुद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा, दीपक भारद्वाज शामिल हैं। 2013 बैच के उप निरीक्षकों को बिना कोई बांड के पहली तैनाती 3 वर्षों के लिए सन 2016 में बस्तर रेंज भेजा गया था, परन्तु नक्सलवाद के खात्मा के बाद भी उनके परिवार को उनके वापस आने का इंतजार ही है।
संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में बस्तर रेंज में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के स्थानांतरण हेतु लगाई गई याचिका में पुलिस विभाग ने बताया है कि निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का अनुसूचित क्षेत्र से 3 वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है, परंतु 8-10 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक बस्तर में पदस्थ 200-250 पुलिस अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ शासन एवं पुलिस मुख्यालय की स्थानांतरण नीति पर अब संदेह होने लगा है।
उज्जवल दीवान ने माननीय मुख्यमंत्री, गृह मंत्री एवं पुलिस महानिदेशक से विनम्र अपील की है कि लंबे समय से बस्तर रेंज में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का जल्द से जल्द तबादला करें ताकि जून महीने में वे अपने बच्चों का नवीन जिले के स्कूल में एडमिशन करवा सकें और अपने परिवार के साथ रह सकें।