बारिश के पानी में छिप रहे हैं जानलेवा गड्ढे, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा,, जिम्मेदार मौन
सूरजपुर / कहने को तो यह जिला मुख्यालय का न्यू हाईटेक बस स्टैंड है जिसे करोड़ों रुपए की भारी-भरकम लागत से जनता की सहूलियत के लिए तैयार किया गया था।
लेकिन आज धरातल पर इसकी हकीकत देखकर लगता है कि यह हाईटेक बस स्टैंड कम और मौत का कुआँ ज़्यादा बन चुका है।

बस स्टैंड के चारों तरफ गंदगी का अंबार और जानलेवा गड्ढों का ऐसा मायाजाल फैला है, जो हर पल किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे रहा है।
बारिश ने खोली पोल पानी में छिपे ‘काल’ के गाल
मानसून की शुरुआत होते ही इस तथाकथित हाईटेक बस स्टैंड की पोल पूरी तरह खुल गई है।
जलभराव के कारण सड़क पर बने गहरे गड्ढे पानी से लबालब भर चुके हैं। इसके चलते वाहन चालकों और राहगीरों को यह अंदाजा ही नहीं मिल पाता कि सड़क कहाँ है और गड्ढा कहाँ। दोपहिया वाहन चालक रोजाना यहाँ फिसलकर चोटिल हो रहे हैं, वहीं भारी बसों के पलटने का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है।

करोड़ों की लागत से बने इस हाईटेक बस स्टैंड पर कदम-कदम पर अव्यवस्थाओं का आलम है। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जागेगा
मुख्य समस्याएं: एक नज़र में, गड्ढों का अंबार बस स्टैंड परिसर और एप्रोच रोड पर इतने गड्ढे हैं कि गाड़ियों के पुर्जे ढीले हो रहे हैं और यात्रियों की रीढ़ की हड्डी में दर्द।
गंदगी का साम्राज्य
चारों तरफ पसरा कचरा और जलजमाव के कारण उठती बदबू ने यात्रियों का दम घोट रखा है। संक्रामक बीमारियों का खतरा अलग से मंडरा रहा है।
सुरक्षा ताक पर
रात के समय पर्याप्त रोशनी न होने और पानी से भरे गड्ढों के कारण यहाँ से गुजरना साक्षात काल को बुलावा देने जैसा है।
अधिकारियों की लापरवाही, जनता पर भारी
सवालों के घेरे में वह सिस्टम है जिसने करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा दिए, लेकिन रख-रखाव के नाम पर हाथ खड़े कर लिए। स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों में इस बदहाली को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इन गड्ढों को नहीं भरा गया और ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं किया गया, तो यहाँ कोई भी बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया जिम्मेदार विभाग इस तीखी हकीकत को देखकर जागता है या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करता है।