मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में कुछ महीने पहले जिस ड्रग्स रेड को पुलिस विभाग अपनी पीठ थपथपाने वाली एक बड़ी कामयाबी बता रहा था, वही कार्रवाई अब उसके लिए गले की फांस बन गई है। करोड़ों रुपये की एमडी ड्रग्स और नशीले पदार्थ बनाने की फैक्टरी पकड़ने के मामले में राजस्थान की चौमहला कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस पूरी कार्रवाई को संदेहास्पद और नियमों के खिलाफ मानते हुए आगर मालवा के दो थाना प्रभारियों (TI) समेत करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है।

परिजनों की शिकायत पर कोर्ट ने कराई जांच, सामने आईं गंभीर खामियां
यह पूरा मामला तब पलटा जब जनवरी 2026 में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के परिजनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। परिजनों का आरोप था कि आगर मालवा पुलिस ने पूरी कहानी मनगढ़ंत तरीके से रची है और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के कड़े नियमों का पालन नहीं किया। चौमहला कोर्ट ने जब इस शिकायत पर आंतरिक जांच कराई, तो पुलिसिया कार्रवाई में कई गंभीर कानूनी कमियां और बड़ी लापरवाही सामने आईं:
- स्थानीय पुलिस को नहीं दी सूचना: नियमानुसार किसी दूसरे राज्य की सीमा में छापेमारी करने से पहले वहां के स्थानीय थाने को सूचित करना अनिवार्य होता है, लेकिन आगर मालवा पुलिस ने राजस्थान की स्थानीय पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी।
- रोजनामचा रिकॉर्ड गायब: पुलिस टीम की रवानगी और वापसी से जुड़ी ‘आमद-रवानगी’ का रोजनामचा (रोजाना का सरकारी रिकॉर्ड) भी अपडेट नहीं किया गया था।
- वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई: इतने बड़े छापे और जब्ती के दौरान नियमों के मुताबिक पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की जानी चाहिए थी, जिसे पुलिस ने नहीं किया।
‘मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई थी’— पुलिस की इस दलील को कोर्ट ने माना झूठ
अदालत में आगर मालवा पुलिस की साख उस वक्त पूरी तरह गिर गई, जब उन्होंने स्थानीय पुलिस को सूचना न दे पाने के पीछे यह तर्क दिया कि उनके मोबाइल फोन की बैटरी खत्म हो गई थी। अदालत ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए संदेहास्पद माना। कोर्ट का कहना था कि जब इस पूरी रेड में 90 के करीब पुलिसकर्मी शामिल थे, तो यह व्यावहारिक रूप से असंभव है कि सभी पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन एक साथ बंद हो गए हों। कोर्ट ने इसे स्थानीय पुलिस से सच छिपाने का बहाना माना।
इन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा
अदालत के कड़े आदेश के बाद राजस्थान के डग थाने में मध्य प्रदेश के इन पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है:
- आगर मालवा कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय
- बड़ौद थाना प्रभारी रूपसिंह राजपूत
- उपनिरीक्षक (SI) राखी गुर्जर
- सहायक उपनिरीक्षक (ASI) अजय जाट
- पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा और शुभम सहित पूरी टीम के करीब 90 पुलिसकर्मी।
इस मामले पर आरोपी थाना प्रभारी शशि उपाध्याय का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर करेंगे। वहीं, फरियादी पक्ष के वकील असगर अली ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि इस फैसले ने पुलिसिया कार्रवाई की पारदर्शिता की पोल खोल दी है।
क्या था जनवरी 2026 का वो पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद आगर मालवा पुलिस द्वारा की गई एक कार्रवाई से शुरू हुआ था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने सबसे पहले सुसनेर के रहने वाले फैजान को आगर-सुसनेर रोड से गिरफ्तार किया था। उसके पास से 33 लाख रुपये कीमत की 330 ग्राम एमडी ड्रग्स मिली थी। फैजान से हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस ड्रग्स का नेटवर्क राजस्थान के झालावाड़ से जुड़ा है।
इसके बाद 28 जनवरी 2026 की रात को करीब 90 पुलिसकर्मियों की भारी-भरकम टीम ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में एक मकान पर अचानक दबिश दी। पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने मौके से शाहीर खान और मुनव्वर खान उर्फ राजा को गिरफ्तार किया है और वहां चल रही ड्रग्स बनाने की अवैध फैक्टरी का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से स्मैक, केटामाइन केमिकल, नशीले इंजेक्शन, ड्रम, ड्रग्स बनाने की मशीनें, एक भरमार बंदूक और एक एयर गन समेत करीब 5 करोड़ रुपये का माल जब्त करने का दावा किया था, जो अब कानूनी विवादों में घिर चुका है।