आज देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ अधिकमास की सोमवती अमावस्या मनाई जा रही है। कई वर्षों के बाद बने इस दुर्लभ और पवित्र संयोग पर सुबह से ही विभिन्न तीर्थ स्थलों और पवित्र नदियों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मान्यता है कि इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और पितरों की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून को दोपहर 12:19 बजे हुई थी, जिसका समापन आज सुबह 8:23 बजे हो रहा है। शास्त्रों में उदया तिथि के महत्व के कारण आज सोमवार को ही सोमवती अमावस्या का पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। अधिकमास में सोमवार के दिन अमावस्या पड़ने से इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।
मोक्षदायी है पुरुषोत्तम मास की अमावस्या
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस महीने में किए गए दान, जप और तप का फल कभी नष्ट नहीं होता बल्कि वह स्थायी हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी इस मास को मोक्षदाता बताया है। सोमवती अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, वहीं दान-पुण्य करने से शनि दोष का प्रभाव भी कम होता है।
पूजा और तर्पण का शुभ मुहूर्त
पवित्र स्नान (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे तक (स्नान के लिए सर्वोत्तम समय)।
पितृ तर्पण मुहूर्त: सुबह 6:00 बजे से 8:00 बजे तक (पूर्वजों की शांति के लिए सबसे अनुकूल)।
ऐसे करें पूजा और दान
आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की स्थापना कर उन्हें पीले फूल, चंदन, अक्षत और भोग अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। आज के दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार काले तिल, गेहूं, वस्त्र, छाते और जूते का दान करना चाहिए, साथ ही गाय को चारा खिलाना भी शुभ फल देता है।