आदिवासियों से वसूली, मकान अधूरा; पंचायत की कार्यशैली कटघरे में
‘नवीन दुर्गम
बीजापुर। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और बेघर परिवारों को पक्का आशियाना उपलब्ध कराना है, लेकिन बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड की ग्राम पंचायत दम्मूर में योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पंचायत के तत्कालीन सचिव ने दो आदिवासी हितग्राहियों से मकान निर्माण कराने के नाम पर 80 हजार रुपये वसूल लिए, लेकिन न तो मकान बनवाया और न ही उनकी रकम वापस की। मामला सामने आने के बाद प्रशासन को सरपंच और सचिव को नोटिस जारी करना पड़ा है।

जानकारी के अनुसार दम्मूर पंचायत के दो आदिवासी परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने का इंतजार कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान पंचायत के तत्कालीन सचिव ओम प्रकाश कोरम ने निर्माण कार्य शुरू कराने का भरोसा देकर दोनों हितग्राहियों से 40-40 हजार रुपये लिए। गरीब परिवारों ने उम्मीद की कि वर्षों की कच्ची जिंदगी खत्म होगी और उनके सिर पर पक्की छत होगी, लेकिन आरोपों के मुताबिक उनकी उम्मीदों के साथ ही उनके पैसों का भी खेल हो गया।
पीड़ित हितग्राही सुरेश चिड़ेम का कहना है कि रकम देने के बाद मकान निर्माण के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। जमीन पर कुछ गड्ढे खोद दिए गए और नींव डालने की तैयारी का दिखावा किया गया, लेकिन इसके बाद पूरा काम ठप हो गया। महीनों तक वे पंचायत और अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, मगर न मकान बना और न ही उनकी जमा की गई रकम वापस मिली।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतें पहले से थीं तो जिम्मेदार अधिकारी इतने लंबे समय तक मौन क्यों रहे? आरोप है कि जून 2025 से मामला अधिकारियों के संज्ञान में था, लेकिन इसके बावजूद किसी ने मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति जानने की जरूरत नहीं समझी। न तकनीकी अमले ने निरीक्षण किया और न ही पंचायत स्तर पर किसी प्रकार की जवाबदेही तय की गई। नतीजा यह हुआ कि गरीब आदिवासी परिवार लगभग एक साल तक अपने ही अधिकार के लिए दर-दर भटकते रहे।
यह मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायत और जनपद स्तर की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि प्रधानमंत्री आवास जैसी महत्वाकांक्षी योजना में लाभार्थियों से पैसे लेने के आरोप सही साबित होते हैं तो यह गरीबों के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी चोट है।
मामला सार्वजनिक होने और शिकायत प्रशासन तक पहुंचने के बाद जनपद पंचायत भोपालपटनम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आदित्य कुंजाम ने संबंधित पंचायत के सरपंच और सचिव को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब मांगा गया है और यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। वे इस बात की भी मांग कर रहे हैं कि यदि हितग्राहियों से वास्तव में राशि ली गई है तो उनकी रकम वापस दिलाई जाए, अधूरे पड़े मकानों का निर्माण पूरा कराया जाए और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को घर देने का सपना दिखाया जाता है, लेकिन दम्मूर पंचायत का यह मामला बताता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी कमजोर पड़ जाए तो योजनाएं जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की भेंट चढ़ सकती हैं। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच पर है कि यह कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित रहती है या फिर गरीब आदिवासियों को न्याय भी मिलता है।