अतिरिक्त प्रभार के काले खेल में प्रधानमंत्री आवास योजना प्रभावित
सूरजपुर / भैयाथान / जिले के जनपद पंचायत भैयाथान में इन दिनों पंचायत सचिवों की बल्ले बल्ले है।
नियम-कायदों को ताक पर रखकर कई सचिव अपनी पसंदीदा और आर्थिक रूप से संपन्न मलाईदार ग्राम पंचायतों में अंगद के पांव की तरह जम गए हैं।
अतिरिक्त प्रभार का मोह ऐसा कि सालों बीत जाने के बाद भी ये सचिव अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जिसका सीधा असर ग्रामीण विकास और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।
ऐसा कहा जा सकता है कि अतिरिक्त प्रभार मलाई छानने का सुरक्षित जरिया बन गया है
सूत्रों की मानें तो जिले के जनपद पंचायत भैयाथान में कई ग्राम पंचायतों में एक ही सचिव के पास मूल पंचायत के अलावा अन्य पंचायतों का जिम्मा है।
जो अतिरिक्त प्रभार के नाम पर चल रहे इस खेल में केवल उन्हीं पंचायतों को चुना जाता है जहाँ बजट ज्यादा होता है या निर्माण कार्य अधिक प्रस्तावित होते हैं।
इनमें तो कई ऐसे सचिव है जो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे होने के कारण इन सचिवों ने अपना एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया है, जिससे भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होती जा रही हैं।
सचिवों के मुख्यालय से नदारद रहने और दो-तीन पंचायतों के चक्कर काटने के कारण ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए भटकना पड़ता है
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और राशन कार्ड जैसे जरूरी कार्यों के लिए ग्रामीण को हफ़्तों इंतजार करना पड़ता है
सबसे ज्यादा प्रभावित प्रधानमंत्री आवास व अधूरे निर्माण कार्य
कई ग्राम पंचायतों के विभिन्न ग्रामीणों का आरोप है कि जमे हुए सचिवों की ऊंची पहुंच के कारण उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
नए कारनामों की चर्चा आम बात हो गई है इन पंचायतों में जमे सचिवों के नए-नए कारनामे भी अब सुर्खियां बटोर रहे हैं। बिना काम कराए भुगतान निकालना, सामग्री आपूर्ति में हेरफेर और मास्टर रोल में गड़बड़ी जैसे मामले जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
रसूख के दम पर जमे इन अंगद रूपी सचिवों के कारण नए और ऊर्जावान सचिवों को काम करने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
क्या प्रशासन की चुप्पी मौन सहमति है
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के ग्रामीण सहित जागरूक नागरिकों का सवाल है कि आखिर प्रशासन इन सचिवों पर इतना मेहरबान क्यों है
क्या स्थानांतरण के नियमों की धज्जियां उड़ाकर इन्हें एक ही जगह टिकाए रखना किसी बड़े मिलीभगत की ओर इशारा करता है
सूरजपुर जिला प्रशासन इन अंगद बने सचिवों की जड़ें हिला पाता है या फिर मलाईदार पंचायतों में भ्रष्टाचार का यह खेल बदस्तूर जारी रहेगा।
बीते दिनों कलेक्टर कार्यालय से राजस्व विभाग के लिपिकों की फेरबदल कर कलेक्टर सूरजपुर के द्वारा विकास कार्य को गति दी गई थी जो आने वाले समय में मिल का पत्थर साबित होगा लेकिन अब आम नागरिकों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि क्या कलेक्टर व सीईओ जिला पंचायत अतिरिक्त प्रभार तत्काल समाप्त कर पारदर्शी तरीके से नए सचिवों की नियुक्ति की जाएगी या यूँ ही ये सिलसिला बदस्तूर जारी रहेगा