दिन ही नहीं, रातें भी हो रहीं गर्म

न्यूनतम तापमान में 2 डिग्री का इजाफा

राजकुमार भल

भाटापारा- होना चाहिए 26 से 28 डिग्री सेल्सियस। है 28 से 30 डिग्री सेल्सियस। रात का यह तापमान स्पष्ट कर रहा है कि छत्तीसगढ़ इस समय केवल गर्मी ही नहीं बल्कि बहुस्तरीय तापीय संकट का सामना कर रहा है।

आमतौर पर अधिकतम तापमान को ही गर्मी का संकेत माना जाता है लेकिन न्यूनतम तापमान, आर्द्रता, सूर्य चमक, वायु वेग और हीट इंडेक्स के बाद मौसमी पैमाने पर अब रात का तापमान भी परखा जाने लगा है। जिसमें रात का तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस पर होने का खुलासा हुआ है। इससे स्पष्ट हुआ है कि अब केवल दिन ही नहीं बल्कि रातें भी गर्म होती जा रहीं हैं।

पहली बार रातें भी गर्म

सामान्य से 2 डिग्री ज्यादा है रात का तापमान। 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच स्थिर यह तापमान रातों को भी गर्म बना चुका है। मौसम वैज्ञानिक इसे ‘वार्म नाइट’ या ‘ट्रॉपिकल नाइट’ की स्थिति मानते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेतों में से एक है। संकट का यह नया रूप वृद्धों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों में हीट स्ट्रोक तथा नींद संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में अधिक दिखाई दे रही है।

इसलिए रातें गर्म

कांक्रीट और कोलतार की सड़कें दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात में धीरे-धीरे उसे छोड़ती रहती हैं। वाहनों, एयर कंडीशनर और औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाली गर्मी भी देर तक वातावरण में बनी रहती है। इस वजह से शहर, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म हो जाते हैं। रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिलों में यह स्थिति ज्यादा महसूस की जा रही है।विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ों की कमी, घटते जल स्रोत और तेजी से बढ़ता शहरीकरण भी रात के तापमान को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। बचाव के दीर्घकालिक उपायों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण, शहरी हरित क्षेत्र का विस्तार, जल संरक्षण और ताप-अनुकूल निर्माण पद्धतियां प्रमुख मानी जा रही हैं।

गहरा प्रभाव इन पर

पशुधन, वन्य जीव और पक्षियों पर इस नए तापीय परिवर्तन का प्रभाव सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। पक्षी शरीर से अतिरिक्त गर्मी बाहर नहीं निकाल पा रहे हैं, जिससे उनकी उड़ान क्षमता और भोजन खोजने की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। मवेशियों में आहार के प्रति अरुचि, अधिक पानी पीना और जल स्रोतों के आसपास ही रहने जैसी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं।वन क्षेत्रों में रहने वाले वन्य जीव भी रात्रिकालीन तापमान बढ़ने से तनाव की स्थिति में हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार गर्म रातें जैव विविधता, प्रजनन व्यवहार और प्राकृतिक पारिस्थितिकी संतुलन पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती हैं।

जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत

रात का लगातार बढ़ता तापमान जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत है। सामान्यतः रातें वातावरण को ठंडा होने का अवसर देती हैं, लेकिन अब यह प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। इससे मानव स्वास्थ्य, कृषि, पशुधन और जैव विविधता सभी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर ताप प्रबंधन रणनीतियां अपनाना समय की आवश्यकता है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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