भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सास और रिटायर्ड ज्यूडिशियल ऑफिसर गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी में मौजूद महत्वपूर्ण तथ्यों, व्हाट्सऐप चैट्स, गवाहों के बयानों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में राहत दे दी थी, जो कि न्यायसंगत नहीं है।
शादी के महज 5 महीने बाद संदिग्ध मौत, शरीर पर मिलीं 6 चोटें
मामले के अनुसार, ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के महज 5 महीने बाद ही 12 मई 2026 को भोपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी के फंदे पर लटकती हुई ट्विशा की लाश मिली थी। एम्स भोपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ कि फांसी के अलावा ट्विशा के शरीर पर छह अन्य गंभीर चोटों के निशान थे, जिसमें चार चोटें बाएं हाथ, एक उंगली और एक सिर पर पाई गई थी। एम्स की क्वेरी रिपोर्ट में साफ कहा गया कि ये चोटें शव को फंदे से नीचे उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं, बल्कि मौत से पहले की थीं।
व्हाट्सऐप चैट्स खोलेगा राज: जबरन गर्भपात और चरित्र पर शक का आरोप
मृतका के पिता नवनीधि शर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट में कई चौंकाने वाले व्हाट्सऐप चैट्स पेश किए। इन चैट्स से साफ जाहिर होता है कि ट्विशा भारी मानसिक तनाव में थी। गर्भवती होने के बाद पति और सास गिरिबाला सिंह उसके चरित्र पर शक करते थे और बच्चे को अपनाने से इनकार कर रहे थे। चैट्स के मुताबिक, ससुराल वाले ट्विशा पर जबरन गर्भपात (Abortion) कराने का लगातार दबाव बना रहे थे और कहते थे कि गर्भपात के बाद ही उसे घर में रहने दिया जाएगा। ट्विशा ने अपने चैट्स में लिखा था कि ससुराल वाले उसे न तो खुश रहने दे रहे हैं और न ही रोने दे रहे हैं।
सीबीआई की एंट्री और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने जांच दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट यानी सीबीआई (CBI) को सौंप दी है, जिसने 25 मई 2026 को नई एफआईआर (FIR) दर्ज कर मामले को अपने हाथ में ले लिया है। कोर्ट में सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी गिरिबाला सिंह खुद एक रिटायर्ड ज्यूडिशियल ऑफिसर हैं और उन्होंने साइबर फॉरेंसिक व क्राइम सीन मैनेजमेंट की विशेष ट्रेनिंग ली हुई है। ऐसे में उन्होंने अपने रसूख और कौशलों का इस्तेमाल कर घटनास्थल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है। इसके अलावा जमानत मिलने के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की और नोटिस मिलने के बाद भी जांच में सहयोग नहीं किया।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि दहेज प्रताड़ना, प्रताड़ना के कारण आत्महत्या के लिए उकसाना और जबरन गर्भपात के आरोप प्रथम दृष्टया बेहद गंभीर हैं। जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी प्रभावशाली हैं, इसलिए 15 मई 2026 को भोपाल की सत्र अदालत द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत का आदेश कानूनी रूप से सही नहीं है। हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब आरोपी सास की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।