कोंडागांव : अवैध लकड़ी परिवहन और उससे जुड़े कथित संरक्षण तंत्र को लेकर विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। जिले के कुछ पत्रकारों द्वारा उठाए गए आरोपों और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया है। आरोपों के केंद्र में भाजपा कन्या शक्ति की जिला संयोजिका ज्योति उर्फ जूही तिवारी और उनकी सहयोगी बताई जा रही प्रवीण पुजारी हैं। वहीं दूसरी ओर, संबंधित पक्षों की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पूरा विवाद 18 मई की रात उस समय शुरू हुआ, जब मसोरा अग्रवाल पेट्रोल पंप के पास अवैध लकड़ी से लदी एक संदिग्ध गाड़ी को वन विभाग की कार्रवाई में पकड़ा गया। इस कार्रवाई में कुछ स्थानीय पत्रकारों की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है। इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ तब लिया, जब संबंधित पत्रकारों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। पत्रकारों का आरोप है कि उन्हें दबाव में लेने और झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई।
मामले को लेकर पत्रकारों ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजने का दावा किया है। शिकायतें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंहदेव के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय, वन मंत्री केदार कश्यप, प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी, भाजपा जिलाध्यक्ष सेवकराम नेताम और पुलिस प्रशासन को भेजी गई हैं। पत्रकारों का कहना है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य हैं, जो कथित लकड़ी तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। इनमें वन विभाग के समक्ष दर्ज एक कथित बयान का भी उल्लेख किया जा रहा है। दावा किया गया है कि इस बयान में अवैध कटाई और लकड़ी परिवहन को लेकर कुछ नामों का जिक्र किया गया है। हालांकि इन दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सार्वजनिक रूप से नहीं हो सकी है।
इस मामले में एक वाहन मालिक उत्तम कुमार नेवरा का वीडियो बयान भी चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर कहा है कि उन्हें दस्तावेज पूरे होने का भरोसा दिलाकर वाहन भेजा गया था। उनका आरोप है कि कार्रवाई के बाद उन्हें अकेला छोड़ दिया गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है।
इसी बीच पत्रकारों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शिकायत दर्ज होने के अगले दिन एक पत्रकार के फोन-पे खाते में बिना किसी पूर्व बातचीत के 2500 रुपये ट्रांसफर किए गए। पत्रकारों का आरोप है कि यह भविष्य में उगाही या लेन-देन से जुड़े आरोप लगाने के उद्देश्य से किया गया “डिजिटल ट्रैप” था। संबंधित लेन-देन की जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज कराने की बात भी कही गई है।
पत्रकारों ने अपने बचाव में तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य भी पेश किए हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार के संबंध में सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड उपलब्ध होने का दावा किया गया है, जबकि दूसरे पत्रकार ने घटना के दौरान राज्य से बाहर होने के समर्थन में रेलवे टिकट और लोकेशन रिकॉर्ड पुलिस को सौंपने की बात कही है। मामले ने एक और संवेदनशील मोड़ तब लिया, जब पत्रकारों ने पुलिस को लिखित रूप से यह आशंका जताई कि भविष्य में उनके खिलाफ छेड़छाड़ या अन्य गंभीर धाराओं के तहत प्रतिशोधात्मक शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए किसी भी एकतरफा कार्रवाई से बचने का आग्रह किया है।
वहीं, पत्रकार संगठनों ने भाजपा नेतृत्व से ज्योति उर्फ जूही तिवारी के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की अपील की गई है। फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। वन संपदा की अवैध कटाई, राजनीतिक संरक्षण, पत्रकारों पर दबाव और डिजिटल साक्ष्यों के दावों ने इसे एक संवेदनशील मुद्दा बना दिया है। अब निगाहें प्रशासनिक जांच और पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और पूरे घटनाक्रम के पीछे वास्तव में कौन-कौन लोग शामिल हैं।