अंबिकापुर (सरगुजा)। सरगुजा पुलिस ने अपराधियों और लंबे समय से फरार चल रहे वारंटियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाकर बड़ी कामयाबी हासिल की है। डीआईजी और एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल (IPS) के कड़े निर्देशों के बाद पुलिस ने जिले भर में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कुल 77 स्थाई और गिरफ्तारी वारंट तामील कर आरोपियों को कोर्ट में पेश किया है। इनमें एक ऐसी महिला आरोपी भी शामिल है, जो पिछले 17 सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रही थी।
एसएसपी की वर्चुअल मीटिंग के बाद एक्शन
इस विशेष अभियान की शुरुआत एसएसपी सरगुजा द्वारा ली गई एक वर्चुअल मीटिंग के बाद हुई। मीटिंग में उन्होंने जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारियों को साफ निर्देश दिए थे कि अपने-अपने इलाकों में पेंडिंग पड़े पुराने वारंटों को जल्द से जल्द तामील करें और सालों से भागे फिर रहे अपराधियों को पकड़कर अदालत के सामने लाएं। कप्तान के आदेश मिलते ही टीमें एक्टिव हुईं और रिकॉर्ड तोड़ गिरफ्तारियां की गईं।
थानों के हिसाब से हुई वारंटों की तामीली
पुलिस टीमों ने अलग-अलग इलाकों में दबिश देकर कुल 57 स्थाई और 20 गिरफ्तारी वारंटों पर एक्शन लिया। थानों के मुताबिक कार्रवाई का आंकड़ा कुछ इस तरह रहा:
- थाना कोतवाली: सबसे ज्यादा 16 वारंट तामील किए गए।
- थाना गांधीनगर: पुलिस टीम ने 13 वारंटियों को दबोचा।
- थाना लुंड्रा: यहां 8 वारंटों पर कार्रवाई हुई।
- थाना लखनपुर: पुलिस ने 6 वारंट तामील कराए।
- थाना सीतापुर व उदयपुर: सीतापुर में 4 और उदयपुर में 3 वारंटियों को पकड़ा गया।
- थाना मणिपुर: टीम ने 3 वारंट तामील किए।
- थाना धौरपुर व चौकी रघुनाथपुर: धौरपुर में 2 और रघुनाथपुर चौकी में 1 वारंट पर एक्शन हुआ।
महिला थाने ने 17 साल से फरार वारंटी को दबोचा
इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी महिला थाना पुलिस के हाथ लगी। पुलिस टीम ने साल 2009 से फरार चल रही एक स्थाई वारंटी महिला को खोज निकाला और उसे गिरफ्तार कर लिया। यह महिला पिछले 17 वर्षों से लगातार अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा दे रही थी।
भविष्य के लिए पुलिस ने तैयार किया बायोमेट्रिक डेटा
पकड़े गए सभी 57 स्थाई वारंटियों को कोर्ट में पेश करने से पहले पुलिस ने उनकी पूरी कुंडली तैयार की है। सुरक्षा और जांच के लिहाज से सभी बदमाशों के फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक स्कैन लिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इस डेटा को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि अगर ये अपराधी भविष्य में किसी भी तरह की आपराधिक वारदात में शामिल होते हैं, तो इनकी पहचान कर तुरंत सख्त कार्रवाई की जा सके।