नई दिल्ली। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में इस साल बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों के लिए चिंता बढ़ाने वाली बात यह है कि अब दुनिया की टॉप-100 लिस्टेड कंपनियों में कोई भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं बची है।

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 की शुरुआत में भारत की तीन बड़ी कंपनियां दुनिया की टॉप-100 कंपनियों में शामिल थीं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, HDFC Bank और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज शामिल थीं। लेकिन अब तीनों कंपनियां इस सूची से बाहर हो चुकी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज की रैंकिंग में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। कंपनी 2025 की शुरुआत में 57वें स्थान पर थी, जो अब फिसलकर करीब 106वें स्थान पर पहुंच गई है।
वहीं इंफोसिस की स्थिति भी कमजोर हुई है। कंपनी 2025 की शुरुआत में वैश्विक स्तर पर 198वें स्थान पर थी, लेकिन अब 590वें स्थान तक पहुंच गई है। इसी तरह ITC भी 702वें स्थान पर पहुंच गई है।
अन्य भारतीय कंपनियों में भारती एयरटेल 202वें स्थान पर रही, जबकि ICICI Bank और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रैंकिंग में भी गिरावट दर्ज की गई है।
इधर विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII और FPI की बिकवाली लगातार जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मई 2026 तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.20 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। सिर्फ अप्रैल महीने में 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारतीय बाजार पर दबाव बना हुआ है। इसका असर आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है।
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