राजनांदगांव। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के तत्वावधान तथा मुख्य संरक्षक व मुख्य न्यायाधिपति छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के दिशा-निर्देशन में नेशनल लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। प्रधान जिला न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री विजय कुमार होता के मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत में वर्चुअल और भौतिक दोनों मोड का उपयोग किया गया।
इस नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय से लेकर तहसील स्तर तक के न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया। राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिलों में राजस्व न्यायालय एवं प्री-लिटिगेशन के कुल 2,63,133 प्रकरणों को चिन्हित किया गया था।
लोक अदालत के परिणाम और सफलता के आंकड़े
प्रधान जिला न्यायाधीश श्री विजय कुमार होता के नेतृत्व में गठित 44 खंडपीठों ने सफलतापूर्वक कार्य करते हुए कुल 2,64,739 मामलों का निपटान किया।
प्री-लिटिगेशन मामले: 2,63,133
लंबित न्यायालयीन मामले: 3,162
कुल निपटान राशि: ₹31,11,56,70,937 (लगभग 31 अरब 11 करोड़ 56 लाख रुपये)
इस दौरान आपराधिक राजीनामा योग्य मामले, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस (धारा-138), वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, बैंक ऋण वसूली, नगर निगम कर, बिजली-टेलीफोन बिल और भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों की सुनवाई कर उनका निपटारा किया गया।
नेशनल लोक अदालत की प्रमुख ‘सफल कहानियां’
- आपसी राजीनामे से बचा बिखरता परिवार
न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्री उत्तरा कुमार कश्यप की अदालत में पदमा टेकाम विरुद्ध संदीप टेकाम का भरण-पोषण का मामला (विविध दांडिक प्रकरण क्रमांक-131/2024) लंबित था। आवेदिका ने शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण पृथक रहने और गुजारा भत्ता दिलाने हेतु आवेदन किया था। लोक अदालत में उभयपक्ष के मध्य काउंसलिंग की गई, जिसके बाद दोनों ने आपसी गिले-शिकवे दूर कर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। - दांपत्य जीवन में लौटी खुशहाली
एक अन्य मामले में रितेश कुमार गुप्ता विरुद्ध श्रीमती निकिता (व्यवहार वाद प्रकरण क्रमांक-164ए/2025) में भी सुखद अंत हुआ। प्रतिवादी के बिना कारण मायके चले जाने के कारण पति ने उसे वापस लाने हेतु वाद प्रस्तुत किया था। न्यायाधीश श्री उत्तरा कुमार कश्यप की मध्यस्थता से दोनों पक्षों में समझौता हुआ और उन्होंने साथ रहना स्वीकार किया। - कर्ज के बोझ से मिली मुक्ति
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री विजय कुमार होता की अदालत में बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा अनुज राम वर्मा के विरुद्ध ₹4,52,991 की वसूली हेतु प्री-लिटिगेशन वाद प्रस्तुत किया गया था। लोक अदालत के मंच पर समझौते के तहत ₹2,17,000 नगद भुगतान पर सहमति बनी और लंबे समय से चल रहे इस कर्ज संबंधी विवाद का अंत हुआ। - वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बंदी प्रकरण का निराकरण
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री अमिता जायसवाल की खंडपीठ में बाइक चोरी से संबंधित एक मामले का अनोखा निपटारा हुआ। प्रार्थी राजेश मेश्राम की मोटर साइकिल चोरी के मामले में अभियुक्त जेल में था। चूंकि प्रार्थी की पत्नी के नाम पर वाहन था, इसलिए उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर राजीनामा की अनुमति दी। समझौते के आधार पर मामले का शमन हुआ और विचाराधीन बंदी की रिहाई के आदेश जारी किए गए।