रायपुर की जेलों में ‘निश्चय’ कार्यक्रम की गूंज, बंदियों को मिले कौशल प्रमाण पत्र

छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद युवा बंदियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें अपराध की दुनिया से बाहर निकालने के लिए निश्चय कार्यक्रम तेजी से चलाया जा रहा है। इस विशेष पहल के तहत जेल में बंद युवाओं को केवल सजा ही नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए तैयार भी किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत बंदियों की काउंसलिंग, कौशल प्रशिक्षण और रिहाई के बाद आर्थिक मदद पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस अभियान को उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत के सहयोग से प्रभावी बनाया जा रहा है।

कौशल विकास प्रमाण पत्र का वितरण

इसी दिशा में 10 मई को केंद्रीय जेल रायपुर और महिला जेल रायपुर में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान कुल 67 बंदियों को कौशल विकास प्रशिक्षण पूरा करने पर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इनमें 38 महिला और 29 पुरुष बंदी शामिल हैं। ये प्रमाण पत्र इस बात का प्रतीक हैं कि बंदी अब समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम हो रहे हैं।

कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत

तकनीकी युग के साथ कदम मिलाने के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में एक नए कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ भी किया गया। इस केंद्र के माध्यम से पुरुष और महिला बंदी कंप्यूटर के विभिन्न कोर्स कर सकेंगे, जिससे रिहाई के बाद उन्हें रोजगार पाने में आसानी होगी। इस अवसर पर डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री और महिला जेल प्रभारी गरिमा पांडेय सहित जेल प्रशासन के तमाम अधिकारी मौजूद रहे।

रोजगार के लिए लगेगा लोन मेला

निश्चय कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बंदियों का आर्थिक पुनर्वास है। रिहाई के बाद बंदी अपना खुद का काम शुरू कर सकें, इसके लिए 13 मई को केंद्रीय जेल रायपुर परिसर में एक विशेष लोन मेला आयोजित किया जाएगा। इंडियन ओवरसीज बैंक द्वारा लगाए जाने वाले इस मेले में पात्र पूर्व बंदियों को स्वरोजगार के लिए ऋण संबंधी जानकारी और सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि यदि रिहाई के बाद युवाओं के पास रोजगार होगा, तो वे दोबारा अपराध की ओर नहीं मुड़ेंगे।

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