नयापारा खुर्द में बच्चों द्वारा त्रिदिवसीय पुतरा पुतरी विवाह, आकर्षक मंडप सजाया । बारातियों का स्वागत किया

ग्रामीणों को मिला स्नेहभोज निमंत्रण

  पिथौरा /  समीपस्थ ग्राम अठ्ठारहगुड़ी , लहरौद , नयापारा खुर्द आदि स्थानों में  अक्षय तृतीया अक्ति पर्व अवसर पर बच्चों द्वारा त्रिदिवसीय पुतरा पुतरी विवाह विधि विधान से रचाया गया  ठीक उसी तरह जिस तरह से वर वधु दोनों पक्षों  के विवाह के समय विवाह रस्म निभाई जाती है  प्रथम दिवस मंडप छादन द्वितीय दिवस तेल , मायन और तृतीय दिवस बेटी विदाई , वधु प्रवेश आदि । ग्राम नयापारा खुर्द में प्रथम दिवस बच्चों ने बड़े ही आकर्षक ढंग से विवाह मंडप सजाया और मंगोरहन लाकर पूजा अर्चना कर

पुतरा पुतरी का तेल रस्म निभाई द्वितीय दिवस मायन नाच कर तृतीय दिवस अक्षय तृतीया के दिन पूरे विधि विधान से बारात स्वागत और बेटी विदाई किये इस अवसर पर गाँव में ग्रामीण बच्चों के इस विवाह समारोह शामिल होकर बच्चों की प्रशंसा कर रहे हैं कहते है अक्ति पर्व पर बच्चों द्वारा इस तरह से पुतरा पुतरी का विवाह रचाया जाता है एक मोहल्ला लड़की पक्ष और दूसरा मोहल्ला लड़का पक्ष की रस्म अदाएगी करते हैं। अक्षय तृतीया अक्ति पर्व विशेष पर साहित्यकार संतोष गुप्ता ने कहा कि अक्ति का पर्व वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है इस लग्न में विवाह सहित अन्य शुभ कार्य फलदायी होता है आगे उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया बसंत ऋतु के समापन और ग्रीष्म ऋतु के आगमन काल है इस पर्व में शुभचिंतक अपने अपने चिर परिचितों को पानी से भरे मिट्टी के घड़े शुभकामना स्वरूप देते हैं कोई कोई शर्बत घोलकर मीठे पानी भी दान करते हैं जिसका उद्देश्य होता है जीवन में हमेशा मिठास , शीतलता बनी रहे ग्रीष्म काल का आगमन होने से इस दिन तन और मन को शीतलता देने वाले खाद्य या पेय पदार्थ शक्कर , इमली , आम , चना से बने सत्तू जिसके सेवन से शरीर को फायदा हो इसका एक दूसरे को दान करते हैं । अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु के नर अवतार , भगवान परशुराम , ब्रम्हा पुत्र अक्षय कुमार , माँ गंगा , अन्नपूर्णा माता का जन्म दिवस भी माना जाता है इसी दिन किसान ग्राम देवता , शीतला माता आदि देवी देवताओं का स्मरण कर सुख , शांति ,समृद्धि की कामना करते अपने खेतों में अन्न छिड़कर अच्छी फसल होने की आशा करते अन्नपूर्णा माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं । इन्ही विशेष कारणों से अक्षय तृतीया पर्व की महत्ता है इस दिन बच्चों द्वारा पुतरा पुतरी का विवाह रचाने का उद्देश्य बच्चों में पारिवारिक जिम्मेदारियों , रीति रिवाजों , सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कराने जीवन जीने की कला से अवगत कराना होता है । इस अवसर पर बच्चों और ग्रामीणों द्वारा पुतरा , पुतरी विवाह का निमंत्रण कार्ड भी छपवाया गया था जिसे ग्रामीणों को बांटा गया था शाम को पार्टी याने पतरी भात ( भंडारा ) का आयोजन किया गया था जहां ग्रामीणों ने भंडारा का आनंद लिया ।

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