नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि पीएम मोदी महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में खारिज होने के मुद्दे पर अपनी बात रख सकते हैं। शुक्रवार को दो दिनों की लंबी बहस के बाद विपक्ष के विरोध के कारण यह अहम विधेयक पारित नहीं हो सका था, जिसे लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
भाजपा का हमला: ‘महिलाओं के साथ विश्वासघात’ भारतीय जनता पार्टी ने विधेयक के गिरने को लोकतंत्र के लिए ‘काला दिन’ करार दिया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है और उन्हें देश की महिलाओं के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। वहीं, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के इस कदम से न केवल महिला सशक्तिकरण कमजोर हुआ है, बल्कि दक्षिण भारत के राज्यों को मिलने वाले अतिरिक्त प्रतिनिधित्व के अवसर को भी नुकसान पहुंचा है।
विपक्ष का पलटवार: ‘संघीय ढांचे को बचाने की जीत’ दूसरी ओर, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इसे सरकार की साजिश बताया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने का एक गुप्त प्रयास था और इसका गिरना संविधान की जीत है। उन्होंने मांग की कि सरकार 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को वर्तमान 543 सीटों के आधार पर तुरंत लागू करे।
सियासी घमासान के बीच मुख्य बिंदु:
- शशि थरूर (कांग्रेस): “हम महिला आरक्षण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन (Delimitation) से जोड़ने पर हमारी कड़ी आपत्ति है।”
- रामगोपाल यादव (सपा): “जब सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं था, तो इस संशोधन को लाने का मकसद सिर्फ राजनीति था।”
- बांसुरी स्वराज (भाजपा): “विपक्ष ने महिलाओं को धोखा दिया है और अपने पुराने वादों से पीछे हट गया है।”
आज रात होने वाले प्रधानमंत्री के संबोधन पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि वे इस मुद्दे पर सरकार का अगला कदम स्पष्ट कर सकते हैं।