नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी की ड्राफ्टिंग कमेटी ने आठवें वेतन आयोग के समक्ष अपना कॉमन मेमोरेंडम पेश कर दिया है। कमेटी ने प्रमुख रूप से मांग रखी है कि वर्तमान में सातवें वेतन आयोग के तहत जो न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये है, उसे बढ़ाकर 69,000 रुपये किया जाए। वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी के लिए कमेटी ने 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की है।
ड्राफ्टिंग कमेटी ने इस बड़ी बढ़ोतरी के पीछे दो मुख्य तर्क दिए हैं। पहला आधार इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मानकों को बनाया गया है, जिसके अनुसार शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन करीब 3,490 किलो कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव परिवार की इकाई को लेकर है। सातवें वेतन आयोग में जहां तीन सदस्यों के परिवार को आधार माना गया था, वहीं आठवें वेतन आयोग के लिए पांच सदस्यों के परिवार को मानक मानकर खर्च का आकलन किया गया है।
कमेटी ने जनवरी 2026 की अनुमानित कीमतों के आधार पर एक औसत परिवार के मासिक खर्च का ब्योरा भी सौंपा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए केवल खान-पान जैसे दाल, चावल, दूध, सब्जियां और फल आदि पर करीब 26,887 रुपये का खर्च आता है। इसमें कपड़े और सिलाई का खर्च जोड़ने पर यह राशि 32,577 रुपये हो जाती है।
इसके अलावा आवास के लिए साढ़े सात प्रतिशत हाउस रेंट जोड़ने पर खर्च 35,020 रुपये तक पहुंचता है। बिजली, पानी और ईंधन के खर्च को शामिल करने के बाद यह आंकड़ा 42,000 रुपये के पार चला जाता है। अंत में शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक जरूरतों, त्योहारों और मनोरंजन के खर्चों को सम्मिलित करने पर एक परिवार का कुल मासिक खर्च लगभग 68,947 रुपये बैठता है। कमेटी का तर्क है कि यदि सरकार इन पैमानों को स्वीकार करती है, तो न्यूनतम सैलरी 69,000 रुपये तय करना अनिवार्य होगा।