CG Ayushman Yojana Action : रायपुर. छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) को लेकर राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के दिशा-निर्देशों और पोर्टल पर जानकारी अपडेट न करने वाले 59 अस्पतालों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया गया है। इनमें से 33 अस्पतालों को योजना से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है, जबकि 26 अस्पतालों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
क्यों हुई कार्रवाई?
नियमों के मुताबिक, सभी पंजीकृत अस्पतालों को ‘हॉस्पिटल एम्पैनलमेंट मॉड्यूल’ (HEM 2.0) पोर्टल पर अपने दस्तावेज और जरूरी जानकारी 31 दिसंबर 2025 तक अपलोड करनी थी। कई बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद इन अस्पतालों ने पोर्टल पर डेटा अपडेट नहीं किया, जिसके बाद राज्य नोडल एजेंसी ने यह सख्त कदम उठाया।
तीन अलग-अलग श्रेणियों में हुई कार्रवाई:
1. आवेदन न करने वाले 21 अस्पताल सस्पेंड: जिन अस्पतालों ने पोर्टल पर एक बार भी अपनी जानकारी दर्ज नहीं की, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें रायपुर के जौहरी, महादेव, न्यू रायपुरा, शिवम, जैन और दुर्ग के ए पी सर्जिकल, आईएमआई जैसे कई अस्पताल शामिल हैं।
2. अधूरी जानकारी देने वाले 12 अस्पताल निलंबित: पोर्टल पर जानकारी अपडेट न करने और विभाग के सवालों का जवाब न देने वाले 12 अन्य अस्पतालों को भी सस्पेंड किया गया है। इनमें रायपुर के काल्दा नर्सिंग होम, प्रज्ञा अस्पताल और महासमुंद का श्री उत्तम साई केयर प्रमुख हैं।
3. 26 अस्पतालों का भुगतान और प्री-ऑथ बंद: जिन अस्पतालों के दस्तावेज अधूरे पाए गए, उनके पेमेंट और नए मरीजों के ‘प्री-ऑथ’ (इलाज की अनुमति) पर रोक लगा दी गई है। इसमें बालोद का शकुंतला अस्पताल, दुर्ग का सुविधा और रायपुर के एकता इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ व रावतपुरा सरकार जैसे बड़े अस्पताल शामिल हैं।
क्वालिटी और पारदर्शिता पर जोर
राज्य नोडल एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई इसलिए की गई है ताकि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को मिलने वाले इलाज में पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता बनी रहे। अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित मानकों का पालन करें, ताकि हितग्राहियों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना न पड़े।
भिलाई के सेक्टर-7 में पीलिया का प्रकोप
एक अन्य चिंताजनक खबर भिलाई से है, जहाँ सेक्टर-7 इलाके में पीलिया ने पैर पसार लिए हैं। पिछले दो दिनों से नलों में गंदा पानी आने की शिकायत मिल रही है, जिसके कारण 35 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए हैं। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।