रेत उत्खनन ने सोखा किलेपार का जलस्तर, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

जल जीवन मिशन फेल: महानदी के तट पर प्यासा है गांव ७ बार बोर फेल होने से मचा हड़कंप

​चारामा-विकासखंड चारामा के ग्राम पंचायत किलेपार में जल संकट ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। महानदी के किनारे बसे होने के बावजूद इस गांव का जलस्तर पाताल में चला गया है, जिसका मुख्य कारण महानदी में हो रहा अनियंत्रित रेत उत्खनन बताया जा रहा है। रेत के अंधाधुंध उठाव के कारण नदी की सोखने की क्षमता खत्म हो गई है और वाटर लेवल तेजी से गिर रहा है। इसी का नतीजा है कि ‘जल जीवन मिशन’ के तहत लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों का गला सूखा है।
​रेत उत्खनन से गहराया संकट


​ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि महानदी से लगातार हो रहे रेत उत्खनन ने गांव के प्राकृतिक जल ढांचे को तबाह कर दिया है। नदी से रेत हटने के कारण भू-जल रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि गांव में वाटर सोर्स ढूंढने के लिए छह से सात बार बोर खनन कराया गया, लेकिन हर बार मशीन खाली हाथ लौटी। महानदी के तट पर बसे गांव में पानी न मिलना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
​शो-पीस बनी टंकी, ठेकेदार हुआ फरार
​बीते दो-ढाई वर्षों से गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह सिर्फ एक ‘शो-पीस’ बनकर रह गई है। पाइपलाइन बिछाने और घर-घर कनेक्शन देने का काम आधा-अधूरा है। ग्रामीणों ने जब घटिया निर्माण कार्य का विरोध किया, तो ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर भाग खड़ा हुआ। अब न तो ठेकेदार का पता है और न ही विभाग के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है
​गर्मियों की शुरुआत होते ही किलेपार में भीषण जल संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है


​लाखो की योजना जमीनी धरातल पर पूरी तरह फेल साबित हो चुकी है।
​ग्रामीणों को पीने एवं निस्तारी पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
​ रेत उत्खनन पर रोक और पाइपलाइन में तकनीकी सुधार कर जल्द जलापूर्ति शुरू नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र प्रदर्शन करने मजबूर होंगे।
​प्रशासन की इस बड़ी चूक और रेत उत्खनन की मनमानी ने किलेपार के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। समय रहते यदि उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले समय में एक बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती है।

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