ओवन पर जमने लगी बर्फ

डीजल पर पहरेदारी ने बढ़ाई मुश्किलें बेकरियों की

राजकुमार मलभाटापारा- महंगा वनस्पति तेल। महंगे पैकिंग मैटेरियल्स। काबू से बाहर जा चुकी है कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत। अब डीजल बिक्री का नया नियम, चौथा ऐसा झटका माना जा रहा है, जिसकी वजह से बेकरियां तालाबंदी जैसे फैसले लेने का विचार कर रहीं हैं।चूल्हे पहले से ही बंद हैं। इलेक्ट्रिक ओवन उपाय था लेकिन महंगी बिजली इसमें बड़ी बाधा बनी हुई है। इसलिए बेकरियां डीजल से चलने वाली ओवन का उपयोग कर रहीं हैं, बेकरी आइटम बनाने के लिए लेकिन यह ओवन भी ठंडे होने लगे हैं क्योंकि अब आसान नहीं रही डीजल की खरीदी।

तालाबंदी की नौबत

ड्रम, कनस्तर, जरीकेन और बोतल में पेट्रोल- डीजल नहीं मिलेगा। वाणिज्यिक उपयोग करने वाली इकाइयों को सक्षम अधिकारी की अनुमति पर ही यह ईंधन उपलब्ध हो पाएगा। यह सख्ती प्रदेश की बेकरियों के लिए तालाबंदी जैसी मानी जा रही है। खासकर उन बेकरियों पर सर्वाधिक प्रतिकूल असर डालने वाली है, जहां डीजल से चलने वाले ओवन में ही बेकरी आइटम का उत्पादन किया जाता है।

आशंका बेकरी आइटम में तेजी की

ब्रेड, टोस्ट और केक तथा पेस्ट्री ऐसे बेकरी आइटम हैं, जिनकी मांग लगभग पूरे साल रहती है। ताजा परिस्थितियों में इनकी कीमत बढ़ने की प्रबल आशंका है क्योंकि मांग का स्तर बराबर बना हुआ है। छोटी इकाइयां संचालन में हैं तो सही लेकिन रोजाना की मांग पूरा करने में समर्थ नहीं हैं। इसलिए चालू बेकरी आइटम में शॉर्टेज जैसी स्थिति बन सकती है।

संकट में यह भी

करीब आ रही है अक्षय तृतीया। शादी- ब्याह की तारीखें लग चुकी हैं। ऐसे में डी जे संचालकों के पास अग्रिम बुकिंग के लिए आर्डर पहुंच रहे हैं लेकिन पर्याप्त डीजल इन्हें भी नहीं मिल रहा है। जरूरत की मात्रा के लिए इनको सक्षम अधिकारी से लिखित में अनुमति लेना होगा। दौड़ लगा रहे हैं अनुमति के लिए लेकिन इनके लिए भी आसान इसलिए नहीं क्योंकि सिस्टम सहित विक्रय केंद्रों तक जाने के सख्त नियम प्रभावी किये जा चुके हैं।

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