भानुप्रतापपुर। जिले के दुर्गुकोंदल ब्लॉक में फल-फूल रहे अवैध रेत उत्खनन और पुलिस प्रशासन की कथित मिलीभगत ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। गुरुवार को भानुप्रतापपुर के मुख्य चौक पर ग्रामीणों, जन प्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में एकत्रित होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर स्थानीय एसडीओपी और रेत माफियाओं के बीच सांठगांठ का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रदर्शन का मुख्य केंद्र एसडीओपी शेर बहादुर सिंह को पद से हटाने की मांग रही। ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीओपी न केवल माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं, बल्कि विरोध करने वाले जनप्रतिनिधियों को डरा-धमका भी रहे हैं। ज्ञापन के अनुसार, पूर्व जनपद सदस्य व पूर्व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सोपसिंह आंचला को एसडीओपी द्वारा टांग तोड़ने की धमकी दी गई है, जिसका ऑडियो साक्ष्य भी उच्चाधिकारियों को सौंपा गया है। ग्रामीणों ने साफ कहा, एसडीओपी का काम कानून की रक्षा करना है, रेत चोरों की दलाली करना नहीं। अगर किसी प्रदर्शनकारी को कुछ हुआ, तो उग्र प्रदर्शन कर दिया जाएगा। वहीं ग्राम पंचायत लोहत्तर की महिला सरपंच बसंती भलेश्वर को रेत खदान संचालित करने वाले लोगों के आदमी घर में घुसकर खुलेआम धमकी दिया जा रहा है उस पर भी जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया जा रहा है।
दिखावे की कार्रवाई: दिन में सील, रात में खेल
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्राम डंडईखेड़ा और मेरेगांव में रेत का अवैध कारोबार चरम पर है। प्रशासन दिन में मशीनें सील करने का नाटक करता है, लेकिन वही मशीनें रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक धड़ल्ले से नदियों का सीना चीर रही हैं। यह सब पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर सचिन दुबे नामक व्यक्ति का नाम लेते हुए उसे रेत माफिया का सरगना बताया, जो खुद को सत्ताधारी दल का नेता और पुलिस का मित्र बताकर आदिवासियों को डरा रहा है।

प्रमुख मांगें और अल्टीमेटम
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं। एसडीओपी शेर बहादुर सिंह को तत्काल प्रभाव से क्षेत्र से हटाया जाए। रेत माफिया सचिन दुबे और एसडीओपी के संबंधों की निष्पक्ष जांच हो। आदिवासी क्षेत्रों में पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून का सख्ती से पालन हो; बिना ग्राम सभा की अनुमति के कोई उत्खनन न हो। डंडईखेड़ा और मेरेगांव में रात के समय होने वाले अवैध उत्खनन पर पूर्ण रोक लगे।
सर्व आदिवासी समाज ने दिया समर्थन
आंदोलन को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि पूर्व में भी कई अधिकारी सट्टे और जुए के संरक्षण में नप चुके हैं, अब रेत चोरी की बारी है। सर्व आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
एसडीओपी शेरबहादुर सिंह का पुतला दहन,
दूर्गुकोंदल ब्लॉक में पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश की ज्वाला भड़क उठी है। क्षेत्र में बेखौफ चल रहे अवैध रेत उत्खनन और जुआ-सट्टे को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने एसडीओपी शेरबहादुर सिंह के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। मुख्य चौक पर कार्यकर्ताओं ने न केवल एसडीओपी का पुतला फूंका, बल्कि पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि एक जिम्मेदार और सम्मानित पद पर बैठे एसडीओपी शेरबहादुर सिंह आम जनता को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि एसडीओपी द्वारा लोगों को मारने-पीटने की धमकी दी जा रही है, जो कि एक लोक सेवक की मर्यादा के बिल्कुल विपरीत है।
अवैध रेत खदान और जुआ-सट्टे को संरक्षण
प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि
दूर्गुकोंदल ब्लॉक में बिना किसी अनुमति के बड़े पैमाने पर रेत का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जिसे एसडीओपी का कथित संरक्षण प्राप्त है। क्षेत्र में बढ़ रहे जुआ और सट्टे के कारोबार के पीछे भी पुलिस अधिकारी की संलिप्तता की बात कही गई है। एक पुलिस अधिकारी का काम जनता की रक्षा करना है, न कि उन्हें धमकाना और अवैध कारोबारियों को संरक्षण देना। यदि जल्द ही इन गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया और संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
सरेराह पुतला दहन और गंभीर आरोपों के बाद अब जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या विभाग अपने ही अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश देगा या फिर यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा, इस पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।