रायपुर/बिलासपुर। विधानसभा के मौजूदा सत्र में प्रदेश के महाविद्यालयों में रिक्त प्राध्यापकों के पदों और नई भर्तियों को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जहाँ विपक्ष नई नियुक्तियों के लिए तत्काल विज्ञापन जारी करने का दबाव बना रहा है, वहीं इस पूरे परिदृश्य में एक गंभीर मानवीय और प्रशासनिक पक्ष भी उभर कर सामने आया है—वह है वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों (Guest Lecturers) का भविष्य और सेवा सुरक्षा।
विपक्ष की बदली भूमिका पर सवाल
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि जो दल कल तक सत्ता में रहते हुए भर्ती प्रक्रियाओं को गति नहीं दे सके, वे आज विपक्ष में आते ही केवल कुछ ज्ञापनों के आधार पर आनन-फानन में नियुक्तियों की मांग कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए एक-दो लोगों के हितों को ध्यान में रखकर मुद्दा उठाना ‘सकारात्मक विपक्ष’ की पहचान नहीं है। सदन में सत्ता पक्ष की ओर से यह स्पष्ट संकेत जाना चाहिए कि भर्ती एक सतत प्रक्रिया है, जो प्रशासनिक औपचारिकताओं के पूर्ण होने पर ही संभव है। यह प्रक्रिया नियमों के अधीन है और इसमें समय लगना स्वाभाविक है।
अतिथि शिक्षकों की रोजी-रोटी का प्रश्न
वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों और विद्यालयों में हजारों अतिथि शिक्षक अल्प वेतन और अनिश्चितता के बावजूद शैक्षणिक व्यवस्था को संभाले हुए हैं। यदि विपक्ष केवल नई सीधी भर्ती के विज्ञापन पर अड़ा रहता है, तो यह उन अनुभवी शिक्षकों की ‘रोजी-रोटी पर लात मारने’ जैसा होगा जो वर्षों से इस व्यवस्था का हिस्सा हैं।
सकारात्मक सोच की मांग यह है कि:
नई भर्ती के साथ-साथ वर्तमान में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के हितों का भी ख्याल रखा जाए।
उन्हें एक एकमुश्त सम्मानजनक वेतन और जॉब सुरक्षा (Service Security) प्रदान करने पर नीति बने।
भर्ती प्रक्रिया ऐसी हो जिससे वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों का भविष्य अंधकारमय न हो।
सत्ता पक्ष का संभावित और न्यायसंगत रुख
सरकार का दायित्व केवल विज्ञापन निकालना नहीं, बल्कि प्रदेश के हर वर्ग के हितों की रक्षा करना है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा है कि भर्ती की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसे तब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता जब तक सभी विधिक और प्रशासनिक बाधाएं दूर न हो जाएं। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह किसी एक समूह के दबाव में आकर उन लोगों की अनदेखी नहीं करेगी जो पहले से ही व्यवस्था को सुचारू रूप से चला रहे हैं।
निष्कर्ष: सकारात्मक भूमिका की आवश्यकता
विपक्ष को चाहिए कि वह केवल विरोध के लिए विरोध न करे, बल्कि एक ऐसी कार्ययोजना का सुझाव दे जिसमें नए अभ्यर्थियों के लिए अवसर और पुराने अनुभवी शिक्षकों के लिए न्याय—दोनों का संतुलन हो। लोकतंत्र में मुद्दा उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन वह मुद्दा ‘समावेशी’ (Inclusive) होना चाहिए, न कि किसी की आजीविका के लिए संकट पैदा करने वाला।
नियुक्तियों की जल्दबाजी बनाम अतिथि शिक्षकों का भविष्य—विधानसभा में गूंजी सकारात्मक राजनीति की दरकार
31
Mar