मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में डिजिटल लेनदेन के भविष्य को लेकर अपना मास्टर प्लान ‘पेमेंट्स विजन 2028’ पेश कर दिया है। 27 मार्च 2026 को जारी इस रोडमैप का सीधा असर आम आदमी की जेब और बैंकिंग के पुराने तौर-तरीकों पर पड़ेगा। इस नई योजना का मुख्य लक्ष्य ऑनलाइन भुगतान को न केवल तेज बनाना है, बल्कि इसे धोखाधड़ी (Fraud) से पूरी तरह मुक्त करना भी है।
ई-चेक: पुराने चेक की जगह लेगा डिजिटल अवतार
RBI अब पारंपरिक कागजी चेक बुक को धीरे-धीरे चलन से बाहर करने की तैयारी में है। इसकी जगह ‘ई-चेक’ (Electronic Cheques) पेश किए जाएंगे। यह डिजिटल चेक की तरह काम करेगा, जिसमें सुरक्षा के कड़े फीचर्स होंगे। इससे चेक क्लियर होने में लगने वाला कई दिनों का समय घटकर चंद मिनटों या घंटों का रह जाएगा और जाली साइन या चेक बाउंस जैसे फर्जीवाड़ों पर भी लगाम लगेगी।
UPI और नेट बैंकिंग को कर सकेंगे ‘ऑन-ऑफ’
सुरक्षा को अगले स्तर पर ले जाते हुए RBI अब ग्राहकों को ‘पेमेंट ऑन-ऑफ’ की सुविधा देने जा रहा है। जिस तरह आप अपने एटीएम कार्ड को मोबाइल ऐप से ब्लॉक या अनब्लॉक कर सकते हैं, ठीक वैसे ही अब आप अपने UPI और नेट बैंकिंग को भी कंट्रोल कर सकेंगे। जब आपको ट्रांजैक्शन नहीं करना हो, तो आप इसे बंद कर सकते हैं, जिससे कोई भी हैकर आपके खाते में सेंध नहीं लगा पाएगा।
फ्रॉड हुआ तो बैंक भी होंगे जिम्मेदार
अब तक डिजिटल फ्रॉड होने पर ग्राहक को ही अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए भटकना पड़ता था, लेकिन अब ‘शेयर्ड लायबिलिटी फ्रेमवर्क’ के तहत जिम्मेदारी तय होगी। अगर आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो इसके लिए आपका बैंक और जिस बैंक के खाते में पैसा गया है, दोनों ही जवाबदेह होंगे। इससे डूबे हुए पैसे की रिकवरी अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी।
सिम पोर्ट की तरह बदल सकेंगे बैंक
RBI एक और क्रांतिकारी सुविधा ‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस’ लाने जा रहा है। इसके तहत अगर आप अपने वर्तमान बैंक की सर्विस से खुश नहीं हैं, तो अपना बैंक बदलना मोबाइल सिम पोर्ट कराने जितना आसान हो जाएगा। साथ ही, विदेशों में पैसा भेजना अब न केवल सस्ता होगा बल्कि आधार आधारित पेमेंट (AePS) को भी पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाया जाएगा।