रमेश गुप्ता भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई का विशेष बजट सत्र सभागार में राष्ट्रगान के साथ गरिमामय वातावरण में प्रारंभ हुआ। राष्ट्रगान के पश्चात महापौर नीरज पाल ने सभापति गिरवर बंटी साहू एवं सदन के समक्ष अपना अभिभाषण प्रस्तुत करते हुए वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों के साथ आगामी वित्तीय वर्ष के लिए जनहितैषी योजनाओं की विस्तृत रूपरेखा रखी।
प्रस्तुत बजट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में निगम की प्रारंभिक शेष राशि 180 करोड़ 60 लाख 74 हजार, अनुमानित आय 670 करोड़ 67 लाख 73 हजार तथा कुल आय 851 करोड़ 28 लाख 47 हजार आंकी गई है। इसके विरुद्ध 740 करोड़ 23 लाख 32 हजार व्यय का प्रावधान रखा गया है, जबकि 111 करोड़ 05 लाख 15 हजार अंतिम शेष राशि अनुमानित है।

विकास को गति देने वाली प्रमुख योजनाएं
निगम क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की घोषणा की गई। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कचांदुर में 189.57 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। वहीं 60 करोड़ रुपये की लागत से सीपीजी प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 100-150 टन कचरा प्रसंस्करण की होगी।
शहर में खेल और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए 4.97 करोड़ रुपये की लागत से स्विमिंग पूल, 4.99 करोड़ रुपये से रनिंग ट्रैक, 1.99 करोड़ रुपये से स्केटिंग ट्रैक तथा अन्य खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त लगभग 22.50 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक साइंस सेंटर की स्थापना प्रस्तावित है।
व्यावसायिक और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 6.38 करोड़ रुपये से जवाहर मार्केट का उन्नयन तथा 11.42 करोड़ रुपये से नालंदा परिसर का विकास किया जाएगा। वहीं सीवरेज और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए नेहरू नगर और हडको क्षेत्र में करोड़ों रुपये के कार्य प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा प्रियदर्शिनी परिसर (पश्चिम) में 1000 सीटर आधुनिक ऑडिटोरियम, नंदिनी रोड चौड़ीकरण, सर्विस रोड निर्माण, अमृत मिशन 2.0 के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट तथा जल आपूर्ति योजनाएं भी बजट में शामिल हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत “मोर जमीन-मोर मकान” योजना में 5115 में से 5059 आवास पूर्ण होने की जानकारी दी गई।

सदन में उठा विवादों का दौर
बजट सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी बहस भी देखने को मिली। पार्षद पीयूष मिश्रा ने शिक्षा उपकर की राशि के उपयोग पर सवाल उठाते हुए इसे नियम विरुद्ध बताया और आर्थिक अनियमितता की आशंका जताई। इस पर आयुक्त राजीव पांडेय ने आश्वासन दिया कि भविष्य में उक्त राशि का उपयोग केवल शिक्षा के लिए ही किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने विकलांग एवं विधवा हितग्राहियों को मिलने वाली 50 प्रतिशत टैक्स छूट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा पूर्ण टैक्स वसूला जा रहा है, जिसकी जांच कर राहत दी जानी चाहिए।
वहीं पार्षद राजेश चौधरी ने बीएसपी क्षेत्र के लीजधारियों की समस्याओं को उठाते हुए लीज नवीनीकरण के दौरान संभावित कार्रवाई और भवन अनुज्ञा संबंधी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। इस पर आयुक्त ने बताया कि भवन अनुज्ञा का अधिकार निगम के पास है न्यायालय के आदेश पर बीएसपी द्वारा 3.14 करोड़ रुपये निगम को दिए जाने की जानकारी भी दी गई।
पार्षद वीणा चंद्राकर ने अपने वार्ड में केमिकल युक्त पानी की समस्या और पेयजल आपूर्ति की कमी का मुद्दा उठाया। इस पर महापौर ने आश्वासन दिया कि जल टंकी निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।
आयुक्त के बयान पर बवाल
सत्र के दौरान आयुक्त द्वारा दिए गए कथित बयान “बुद्धिपूर्वक चर्चा होगी तो ही बैठूंगा” को लेकर सदन में विवाद की स्थिति बन गई। कांग्रेस और भाजपा दोनों पक्षों के पार्षदों ने इसका विरोध करते हुए आयुक्त को हटाने की मांग तक कर डाली। महापौर नीरज पाल ने भी आयुक्त के व्यवहार को अमर्यादित बताया।
हालांकि आयुक्त ने सफाई देते हुए कहा कि सदन में जवाब देने की प्रक्रिया निर्धारित है और उसी के तहत अधिकारियों की भूमिका तय होती है।
बहुमत से बजट पारित
लंबी चर्चा, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे के बीच अंततः महापौर द्वारा प्रस्तुत बजट को सदन में बहुमत के आधार पर पारित कर दिया गया। अब इस बजट को अनुमोदन के लिए राज्य शासन को भेजा जाएगा।
यह बजट सत्र जहां एक ओर शहर के विकास की नई दिशा तय करने वाला साबित हुआ, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों पर गंभीर सवाल भी खड़े कर गया।